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मुखपृष्ठ JUN. 11, 2019

फर्जी खाता मामले में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जरदारी गिरफ्तार

इस्लामाबाद द्य 10 जून (वा) राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नेब) ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद फर्जी खाता मामले में सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सहअध्यक्ष आसिफ अली जरदारी को गिरफ्तार कर लिया।न्यायालय की इस अनुमति के बाद नेब के अधिकारी इस्लामाबाद स्थित जरदारी के आवास पहुंचे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने आज ही जरदारी और उनकी बहन फरयाल तालपुर को उस समय तगड़ा झटका दिया था जब न्यायालय ने दोनों की स्थायी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कानून प्र

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भविष्य फल
संपादकीय
'हिन्दी मीडियम और हमारी शिक्षा व्यवस्था...
15Jun

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धर्मधारा
लोभ की अतृप्त वृत्तियां जन्म देती हैं क्रोध को
11Jun

लोभ की अतृप्त वृत्तियां जन्म देती हैं क्रोध को

धर्मधारावृत्तियां अपने आप में बुरी नहीं होती हैं। सवाल है उनके जुडऩे का। देव से जुड़कर वे सद्गुण बन जाती हैं और दानव से जुड़कर दुर्गुण। यह वैसे ही हो जाता है, जैसे निर्मल जल नाली में गिरने से गंदा हो जाता है। ब्रह्मा काम के देवता हैं। काम की कोख से सृजन का जन्म होता है। इसीलिए ब्रह्मा को सृष्टिकर्ता कहा जाता है। भगवान् कृष्ण स्वयं गीता में कहते हैं कि 'मैं इच्छाओं में काम हूं।Ó यही उदात्त काम परमात्मा से जुड़कर भक्ति बन जाता है। 'राम मोरे पिउ मैं राम की बहुरिया।Ó परंतु जब यही काम वासना के कीचड़
विशेष लेख
राहुल-वाड्रा कांग्रेस अब पतन की ओर!
11Jun

राहुल-वाड्रा कांग्रेस अब पतन की ओर!

जयकृष्ण गौड़कांग्रेस की दुर्गति क्या करारी पराजय के कारण हो रही है? जिस पार्टी में वैचारिक दृढ़ता नहीं होती वह संकट के समय स्थिर नहीं रह पाती और अस्तित्व को बचाने का सवाल पैदा हो जाता है। चाहे वर्तमान सोनिया-राहुल-वाड्रा की कांग्रेस स्वयं को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कहे, इस नाम की कांग्रेस को इंदिरा गांधी ने 1969 में ही समाप्त कर दिया। इस बारे में उल्लेख करना होगा कि 1966 में लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु होने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने इंदिराजी को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। वरिष्ठ नेताओं को विश्वास था कि इं
प्रेरणादीप
आदर्शवादी गांधी
11Jun

आदर्शवादी गांधी

प्रेरणादीपराज्य आंदोलन के दिनों की बात है। राजकोट में काठियावाड़ राज्य के प्रजा परिषद् का अधिवेशन हो रहा था। बापू अन्य नेताओं के साथ मंचासीन थे। तब ही उनकी दृष्टि एक वृद्ध सज्जन पर पड़ी। गांधीजी को वे कुछ जाने-पहचाने से लगे। स्मरणशक्ति पर जोर देने पर उन्हें याद आया कि वे तो उनके प्राथमिक पाठशाला के अध्यापक हैं। बापू शीघ्र ही मंच से उतरकर उनके पास गे और उनके चरणों के समीप बैठ गए। उन्होंने उनसे परिवार की कुशलक्षेम पूछी। जब बहुत समय इसी प्रकार व्यतीत हो गया तो उनके अध्यापक ने बापू से कहा- 'अब आप मंच पर पधारिए।
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