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संपादकीय
आस्था पर भौतिकवादी सुविधाओं का ग्रहण..!
14Jan

आस्था पर भौतिकवादी सुविधाओं का ग्रहण..!

ब्रेक के बाद - शक्तिसिंह परमारधार्मिक पर्यटन और पर्यटन स्थल दोनों में उतना ही अंतर है, जितना जमीन और आसमान में... क्योंकि धार्मिक यात्राएं आस्था-विश्वास और अपनी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का शाश्वत माध्यम हैं... जबकि पर्यटन स्थल व्यक्ति की मानसिक, शा
धर्मधारा
स्वाद और सेहत भोजन के नियम
29Dec

स्वाद और सेहत भोजन के नियम

खा न-पान का एक नियम है - खाने को पीना चाहिए और पीने को खाना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि ग्रहण किए जाने वाले भोजन को इतना चबाना चाहिए कि वह तरल पदार्थ में तब्दील हो जाए और पीने को अर्थात पेय पदार्थों को खाने से तात्पर्य यह है कि उन्हें इतना धीरे-धीरे पीन
विशेष लेख
आग उगलती लेखनी के धनी कृष्णकुमार अष्ठाना
29Dec

आग उगलती लेखनी के धनी कृष्णकुमार अष्ठाना

  डॉ. विकास दवेकृ ष्णकुमार अष्ठाना (पुत्र स्व. श्री लक्ष्मीनारायणजी अष्ठाना) का जन्म 15 मई 1940 को आगरा जिले के ऊंटगिर ग्राम में हुआ। आपकी प्रारंभिक शिक्षा मुरैना में हुई। प्रखर प्रज्ञा के धनी श्री अष्ठाना की प्राथमिक, स्नातक शिक्षा शासकीय शिक्षण संस
प्रेरणादीप
सच्चा मनुष्य
29Dec

सच्चा मनुष्य

श्रा वस्ती के दो युवकों में बड़ी प्रगाढ़ मैत्री थी, दोनों ही दूसरों की जेब काटने का धंधा करते थे। एक दिन भगवान बुद्ध का एक स्थान पर प्रवचन चल रहा था। अच्छा अवसर जानकर दोनों मित्र वहीं जा पहुंचे। उनमें से एक को भगवान बुद्ध के प्रवचन बहुत अच्छे लगे और वह ध्