काम अच्छा होता है तो लोग बरसों बाद भी देखते हैं
   Date23-Sep-2022

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प्रसिद्ध हास्य अभिनेता राकेश बेदी ने स्वदेश से बातचीत में कहा-
इंदौर द्य अजय जैन 'विकल्पÓ
काम का दबाव हर जगह है, समस्या हर जगह है। हालांकि, फिल्मों में कम है और आम जिंदगी में अधिक है। अगर काम अच्छा होता है तो लोग बरसों बाद भी देखते हैं। समय के साथ चीजें बदलती रहेगी। पहले 10-12 फिल्मों में से 2-3 ही सफल होती थी, आज भी यही स्थिति है।
यह कहना है फिल्म अभिनेता एवं छोटे पर्दे पर भी स्वस्थ हास्य की धूम मचाने वाले राकेश बेदी का। गुुरुवार को इंदौर में देअविवि की पत्रकारिता अध्ययनशाला में अभिनय कार्यशाला लेने पहुंचे श्री बेदी ने विशेष मुलाकात में कई प्रश्नों के उत्तर में 1979 से अब तक की यात्रा को साझा किया। फारूख शेख-दीप्ति नवल के साथ 'चश्मेबद्दूरÓ ही नहीं, दूरदर्शन पर 'ये जो है जिंदगीÓ में सतीश शाह, शफी इनामदार, फरीदा जलाल एवं ओमपुरी सहित अनेक नामी कलाकारों के साथ टीवी धारावाहिक, थियेटर और फिल्मों में भी काम कर चुके श्री बेदी ने बताया कि करीब 44 साल फिल्मी यात्रा में मेरा अनुभव अच्छा ही रहा है। समय के साथ चीजें तब भी बदल रही थी, अब भी बदल रही है। पहले रिटेक पर रिटेक होता था, लेकिन अब डिजीटल तकनीक आने से बहुत परिवर्तन हुआ है। श्री बेदी ने बताया कि पहले भी 10-12 फिल्में बनती थी तो 2-3 ही सफल होती थी। अभी भी यही स्थिति है। फिल्मों की सामग्री यानि कंटेंट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में राकेश बेदी ने बताया कि समय बदला है तो कंटेंट भी बदलेगा ही।