प्रकृति प्रेमी
   Date23-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
से न फ्रांसिस्को के उपनगर शास्तास्प्रिंग में एक बार शास्ता पर्वत की चोटी पर पहुंचने की प्रतियोगिता हुई, जिसमें बहुत से अमेरिकन युवक भाग लेने के लिए आए। इस प्रतियोगिता में एक भारतीय संन्यासी ने भी भाग लिया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अमेरिकन युवक इस दुबले-पतले भारतीय संन्यासी को देखकर मुस्कुराने लगे। प्रतियोगिता आरम्भ हुई। सभी दर्शक तथा प्रतियोगी आश्चर्य से देखते रह गए, संन्यासी सबसे पहले शास्ता पर्वत की चोटी पर पहुंचकर खड़ा हुआ, मुस्कुरा रहा था। उस प्रतियोगिता के विजेता का पुरस्कार उस संन्यासी को दिए जाने की घोषणा की गई, लेकिन संन्यासी ने पुरस्कार नहीं लिया। उस उपहार को अस्वीकार करते हुए कहा कि मैं शास्ता पर्वत की चोटी पर पुरस्कार लेने के लिए नहीं चढ़ा था, बल्कि मैं तो प्रकृति प्रेम के कारण उस चोटी की शोभा देखने गया था। वह संन्यासी और कोई नहीं, निर्भीक स्वामी रामतीर्थ जी ही थे। चाह रखने वाला लक्ष्य प्राप्त करेगा कि नहीं, ये तो भगवान् ही जाने, पर कर्तव्यभाव से लक्ष्य की ओर जाने वाला अवश्य ही पहुंचेगा, यह निकट सत्य है।