महिलाओं को जाग्रति की जरूरत
   Date22-Sep-2022

dharmdhara
धर्मधारा
ऐ सी कई महिलाएं होंगी, जो कार्यस्थल पर अक्सर मेल मेम्बर्स की ओर से असहज बर्ताव का अनुभव करती होंगी, पर किसी न किसी कारणवश आवाज नहीं उठा पातीं। अनेक भय के कारण स्त्री यौन शोषण या असहज बर्ताव के सामने आवाज नहीं उठा पाती। हमारे देश में 48 प्रतिशत स्त्रियां कार्यस्थल पर यौन शोषण या असहज बर्ताव का शिकार होती हैं। इस 48 प्रतिशत में से 70 प्रतिशत स्त्रियां शोषण के खिलाफ आवाज नहीं उठातीं। कार्यस्थल पर स्त्रियां अगर यौन शोषण का शिकार होती हैं तो इसके लिए हर कार्यस्थल पर एक ऐसी कमेटी बनी होती है, जिसके अंतर्गत स्त्रियां शिकायत दर्ज करा सकती हैं। पर नौकरी करने जाने वाली 46 प्रतिशत स्त्रियों को इसके बारे में जानकरी ही नहीं होती है। तो तमाम महिलाओं की यह शिकायत होती है कि शिकायत करने पर भी पुरुष अपनी पहुंच की वजह से बच जाते हैं और उसके बाद वे स्त्री के लिए और परेशानी खड़ी करते हैं। ऐसे भी तमाम मामले सामने आते हैं, जिसमें स्त्रियां ही शिकार स्त्री का साथ नही देतीं। आफिस में सब के साथ मिलजुलकर काम करना जरूरी होता है। रोजाना 8 से 10 घंटे जहां बिताना होता है, वहां का वातावरण मैत्रीपूर्ण होना चाहिए। सभी के साथ मिलजुलकर रहने के साथ-साथ थोड़ा बर्ताव ऐसा भी होना चाहिए कि जिससे आप की डिग्निटी बनी रहे। जिससे कोई आप के साथ गैरवाजिबी या असहज बर्ताव करने में सौ बार सोचे। किस के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए, यह स्त्री अच्छी तरह जानती है। वह हर किसी की नजर भी पहचान सकती है। उसे पता चल जाता है कि कौन कैसा है। कोई अधिक छूटछाट ले, इतना सरल बर्ताव भी न रखें। यौन शोषण की बात करें तो शोषण यानी कि मात्र किसी तरह का शारीरिक स्पर्श ही नहीं, छेड़छाड़ या रेप ही नहीं, यहां शोषण में शाब्दिक शोषण, गैरवाजिबी कमेंट, गलत नजर से देखते रहना, मना करने के बावजूद किसी चीज के लिए बारबार ऑफर करना, मैसेज करना या फोन करना आदि भी शामिल है। अगर पुरुष स्त्री को अच्छा लगता है तो भी उपर्युक्त कोई बर्ताव करता रहे, स्त्री एक-दो बार टोंके, इसके बावजूद वैसा करता रहे तो पुरुष शोषण के अंतर्गत दोषी माना जाएगा। आफिस में होने वाले छेड़छाड़ के लिए बने कानून का दुरुपयोग न करें, किसी के साथ पर्सनल ग्रजीस के कारण उसके ऊपर गलत आरोप न लगाएं, पर जो आप के साथ सचमुच छेड़छाड़ करता हो तो आप उसके खिलाफ सचमुच में आवाज उठा सकती हैं। अगर कुछ गलत हुआ है तो उसके खिलाफ आवाज उठाने का आप को पूरा हक है। याद रखिए, अगर इस तरह की शिकायत करती हैं तो नरम हो कर इस तरह की शिकायत न करें, मजबूत हो कर शिकायत करें, जिससे कमेटी को भी पता चले कि आप अपने हक के प्रति जाग्रत हैं।