मातृभाषा निष्ठा
   Date21-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
श्री राममनोहर लोहिया पीएचडी करने के लिए उन दिनों जर्मनी के प्रोफेसर जुंबार्ड के पास गए हुए थे। वहां जाकर प्रोफेसर जुंबार्ड को लगभग आधे घंटे तक अपने शोध के विषय को अंग्रेजी भाषा में बताते रहे। जब वह चुप हो गए, तब जुंबार्ड ने टूटी-फूटी इंग्लिश में कहा- मुझे अंग्रेजी बोलना नहीं आता। लोहियाजी ने छह महीने तक अपने शोध को पूर्ण करने के लिए जी लगाकर प्राप्त करना ही है, की जिज्ञासा से जर्मनी भाषा को सीखा। जब लोहियाजी छह महीने बाद उनके पास गए और अब मैंने जर्मनी भाषा सीख ली है, की जानकारी उन्हें दी। तब उन्होंने कहा- मैं, अंग्रेजी भाषा जानता हूं, मगर चाहता हूं कि लोग अधिक से अधिक मेरी भाषा बोलें और सीखें। अपनी मातृभाषा के प्रति अत्यन्त लगाव को देखकर लोहियाजी द्रवीभूत होकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने अपना शोधग्रंथ जर्मन भाषा में ही लिखा।