अध्यात्म पथ का पहला कदम सादगीपूर्ण जीवन
   Date21-Sep-2022

dharmdhara
धर्मधारा
कु छ लोगों के लिए सादा जीवन यानी सामान्य जीवन जीना बहुत कठिन हो सकता है, क्योंकि हमें यही सिखाया गया है कि वस्तुओं व संपत्ति का संचय ही सफलता की निशानी है। इससे हम अक्सर अत्यंत तनाव में और अपने जीवन की बेतरतीबी में इस कदर फंस जाते हैं कि किसी उद्देश्य, सार्थकता और खुशी के साथ हमारा जीना दूभर हो जाता है। पर सादगी से भरा जीवन हमको वैसा जीवन गढऩे में मदद कर सकता है, जो हमारे लिए संतोषप्रद और सार्थक होता है। बात चाहे भौतिक पदार्थों की उपलब्धियों की हो या आध्यात्मिक उपलब्धियों की, जीवन में लक्ष्य और संकल्प सबसे ज्यादा जरूरी है और इसके बिना कोई भी उपलब्धि संभव नहीं है। सादगीपूर्ण जीवन की यही विशेषता रही है कि यह हमें अपने लक्ष्य और अपनी प्राथमिकताओं को सही से पहचानने में मदद करता है।
सादगीपूर्ण जीवन अपनाने का प्रमुख हिस्सा होता है-अपनी आवश्यकताओं को कम-से-कम कर लेना। कुछ लोग अपना पूरा जीवन चीजों का संचय करने में बिता देते हैं। अपनी जरूरतों को न्यूनतम करना एक ऐसी चुनौती है, जो सबके लिए आसान नहीं है। सामान्यतया हमें अपनी वस्तुओं से गहरी आसक्ति होती है और इसका पता हमें तब चलता है, जब वे कहीं खो जाती हैं। ऐसा होने पर हम सब कुछ भूलकर उन्हें खोजने में लग जाते हैं। वैसे भी हर व्यक्ति बड़े जतन से अपनी मनोवांछित चीजों का संचय व संग्रह करता है, उन्हें अपनी आवश्यकता बताता है, ऐसे में यदि उन वस्तुओं को त्यागने की बात की जाए, तो यह उसके लिए आसान नहीं होता, क्योंकि उन्हें संग्रह करने में उसका बहुत सारा वक्त और धन खरच हुआ होता है। सादगीपूर्ण जीवन की शुरुआत का पहला कदम यही है कि जीवन की सामान्य जरूरतों के अतिरिक्त अन्य गैर-उपयोगी जरूरतों का भी त्याग किया जाए।
ऐसा करने के लिए हम अपने द्वारा संग्रहित सामान का गंभीरता के साथ अवलोकन करें और यह फैसला करें कि क्या सच में ये हमारे लिए जरूरी है या हमने उसे यों ही अपने पास रख लिया है। इसको जांचने के लिए हमें कुछ मानदंड निर्धारित करने की जरूरत है, जैसे-क्या हमें उसकी आवश्यकता है? क्या अमुक वस्तु हमारे लक्ष्य की प्राप्ति में उपयोगी है? क्या इसके गुम हो जाने से हमारे जीवन पर नकारात्मक असर पड़ेगा? जब हम चीजों को छोडऩा सीखते हैं, तो हमारे अंदर आजादी की, उन्मुक्त होने की एक भावना पैदा होती है। ऐसा करने पर न केवल भौतिक वस्तुओं से आजादी का एहसास, बल्कि उनसे जुड़ी अपेक्षाओं और तनावों से भी मुक्त होने का एहसास पैदा होता है और यह एहसास हमें मानसिक रूप से बहुत हलकापन देता है, सुकून देता है।