शिक्षा परिसर में पसरती विकृति...
   Date20-Sep-2022

vishesh lekh
जिस तरह से तकनीक का उपयोग शैक्षणिक योग्यता को प्रखर करने और व्यापार-कारोबार को नई ऊंचाई देने में हो रहा है, ठीक उसी तरह से आज तकनीक का जिस तरह से बेजा उपयोग हो रहा है, वह आने वाले समय के उस भयावह खतरे का संकेत है, जिसमें बहुत सी बुराइयां और विकृतियां तेजी से घर कर रही है... आखिर शिक्षा परिसरों/संस्थानों का उपयोग हमारे ज्ञान केन्द्रों की भांति विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से ही नहीं, व्यवहारिक एवं राष्ट्रीय कर्तव्य व अधिकार के मान से दक्ष बनाने में होना चाहिए, लेकिन विगत एक दशक के घटनाक्रमों पर नजर डाले तो यह पता चलता है कि शिक्षा संस्थानों और उसी से जुड़े उन रहवासी परिसरों जिनमें विद्यार्थी सामूहिक रूप से रहते हैं, वहां पर न केवल राष्ट्रघाती विचारों का बीजारोपण हो रहा है, बल्कि समाज एवं राष्ट्र में व्यापक रूप से विकृतियों के प्रसार में तकनीकी उलझने लगातार बढ़ाई जा रही है... याद करे किस तरह से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जनेविवि) में भारत तेरे टुकड़े होंगे, न केवल नारे लगे, बल्कि देश विरोधी गतिविधियों के केन्द्र के रूप में भी जनेविवि को स्थापित करने का षड्यंत्र रचा गया... जम्मू-कश्मीर के विश्वविद्यालय में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे क्रिकेट मैच के दौरान खूब लगे और कितना विवाद खड़ा हुआ, हर किसी को ध्यान है... फिर हैदराबाद के विश्वविद्यालय में दलित छात्र रोहित वेमुला द्वारा आत्महत्या के मामले को भी किस तरह से दलित उत्पीडऩ के रूप में प्रचारित किया गया था... और अब पंजाब में मोहाली की चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं के होस्टल में जो नहाते हुए वीडियो वायरल हो रहे हैं और उसके बाद के घटनाक्रमों में जिस तरह से पूरा विवाद का बवंडर खड़ा किया गया, उसके बाद दर्जनभर छात्राओं ने अपनी आबरू से खिलवाड़ होता देख आत्महत्या के लिए भी मजबूर हो गई... जिसमें एक छात्रा की हालत नाजुक है... इस मामले को इस तरह से देखा जाना चाहिए कि क्या आज हमारे शिक्षा संस्थानों और उस परिसर में निवासरत छात्र-छात्राओं के बीच एमएमएस के साथ ही ब्लैकमेलिंग करने की मंशा से या फिर शारीरिक-मानसिक शोषण के लिए जो एमएमएस बनाए गए हैं, वह एक बड़ी साजिश का हिस्सा ही माना जाएगा.., क्योंकि यह एकाध छात्र-छात्रा से जुड़ा विकृति वाला विषय नहीं है, बल्कि इसमें 50 से अधिक छात्राओं को बदनाम करने का षड्यंत्र नजर आता है... फिलहाल पंजाब पुलिस ने चंडीगढ़ विवि वीडियो मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है... अगर इस मामले की गंभीरता के साथ जांच की जाए और दोषियों के साथ ही इसमें बाहरी तत्वों की संलिप्तता को भी जांचा-परखा जाए तो यह मामला नए मोड़ लेकर हर किसी के होश उड़ा सकता है, क्योंकि यह शिक्षा संस्थानों को बदनाम करने का पाप भी है...
दृष्टिकोण
आतंकी पैरवी का चीनी खेल...
विस्तारवादी, वर्चस्ववादी और सर्वभक्षी चीन का खेल वैसे तो अपना बाजार स्थापित करके दूसरे देशों की संप्रभुता एवं स्वतंत्रता को भंग करना रहा है... लेकिन इसी के साथ चीन एक ऐसा आर्थिक मकडज़ाल भी निर्मित करता है, जिसके बोझ तले दबकर छोटे-छोटे देश तेजी से बर्बाद हो रहे हैं... श्रीलंका एवं नेपाल इसके उदाहरण है, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे देश भी है, जिसको चीन लगातार बर्बर दमनचक्र चलाकर अपने पाले में करने का लगातार षड्यंत्र रचता है... इसी कड़ी में चीन के उस हिंसक और आतंकवादी पैरोकार मंसूबों को देखा जा सकता है, जिसमें वह पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी साजिद मीर के पक्ष में खड़ा होकर उसे बचाने के असंभव षड्यंत्र रच रहा है... कितना विरोधाभास है कि एक तरफ चीन भारत के साथ सीमा विवाद मुद्दे पर लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में पीछे कदम हटा रहा है... तो दूसरी तरफ वहीं चीन अमेरिका एवं भारत की रणनीति घेराबंदी के लिए पाकिस्तान के आतंकवादियों को प्रश्रय दे रहा है... आखिर चीन की ऐसी क्या मजबूरी या मंसूबे है, कि वह साजिद मीर जैसे दुर्दांत आतंकवादी को काली सूची में डालने के अमेरिका और भारत के संयुक्त प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अवरुद्ध कर चुका है... चार महीने में बीजिंग का यह तीसरा यह ऐसा कदम है, जब वह आतंकवाद के संरक्षणकर्ता के रूप में डटकर खड़ा हुआ है... मीर भारत के वांछित आतंकियों में से एक है और 2008 के मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता है... मीर की संपत्तियों को कुर्क करने और उस पर यात्रा तथा सश प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव था, जिसको रोकने के लिए चीन अड़ गया, आखिर इसके पीछे कैसे और किस तरह के मंसूबे है, यह समझा जा सकता है...