अनीति का फल
   Date17-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
महाभारतकाल में पैदा हुआ 'श्रुतायुधÓ बल संपन्न राजा था। भगवान शिव की आराधना कर उसने अमोघ गदा प्राप्त कर ली। गदा देते समय शिव ने कहा इस दैवी गदा का कभी भी अनीतिपूर्वक उपयोग किया तो श्रुतायुध। यह लौटकर तुम्हारा ही विनाश कर देगी। विशिष्ठ शक्ति के अहं में व्यक्ति अंधा हो जाता है। महाभारत के युद्ध में श्रुतायुध का अर्जुन से मुकाबला हो गया। युद्ध प्रबल वेग से होने लगा और ही रणकुशल योद्धा अपनी कला दिखाने लगे। श्रुतायुध को अर्जुन ने युद्ध में बहुत परेशान कर दिया। उसे समझ नहीं पड़ रही थी कि अब क्या करना, घबराहट के कारण उसे यह भी याद नहीं रहा कि इस अमोघ गदा के साथ क्या शर्त जुड़ी है और उसके क्या परिणाम होंगे। अर्जुन के सारथी भगवान श्रीकृष्ण को श्रुतायुध की कुरूपता को देखकर हंसी आ गई। यह हंसी उसे तीर की तरह चुभी और आवेश में आकर उसने वह गदा श्रीकृष्ण के ऊपर फेंक चलाई। पूर्व शर्त के अनुसार गदा बीच में से लौट गई और उलटकर श्रुतायुध पर ही जा गिरी। गदा के आघात से उसे मरने में तनिक भी देर न लगी। किसी ने भी तप कर दैवी शक्ति प्राप्त कर लेना अलग बात है, पर उसका सदुपयोग कर लेना दूसरी बात है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह रक्षकशक्ति ही उसके विनाश का कारण बन जाती है।