मोदी में है देश को आगे ले जाने की धुन
   Date17-Sep-2022

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लाल सिंह आर्य
भारत वर्ष के नागरिक अब इस बात को लेकर गर्द का अनुभव कर सकते हैं कि उन्हें नरेन्द्र मोदी के रूप में एक वैश्विक नेता मिला है, जिसका कोई सानी नहीं है। वे अपने आप में इकलौते हैं, जिनका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। अपने ही देश में प्रधानमंत्री के रूप में सारे देशवासियों की चिंता कर उन्होंने बता दिया कि कागजी बातों से नहीं, बल्कि लोगों की मदद कर दिल में उतरना पड़ता है। आप और हम कह सकते हैं कि कोई यूँ ही नरेन्द्र मोदी नहीं बन जाता है। नरेन्द्र मोदी बनने के लिए समर्पण चाहिए, दूरदृष्टि चाहिए और चाहिये गरीबी के लिये चिंता। ये सब करते-करते लगभग एक दशक पूरा होने को है और उन्होंने देश को इस बात के लिए आश्वस्त किया है कि वे प्रधानमंत्री बाद में हैं, पहले देशवासियों के अपने हैं, जो उनका हर कदम पर साथ दे रहे हैं। उनके कार्य व्यवहार से आलोचकों के भी मुँह बंद हो जाते हैं, जब वे दुनिया में भारत का पताका फहराते हैं। क्योंकि सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय का उद्देश्य लेकर वे आम आदमी के दिल तक पहुँचते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल में एक नये भारत की रचना की है। समभाव और समदृष्टि वाले भारत की। ना कोई छोटा होगा और ना कोई बड़ा, ना जात पूछी जाएगी और ना जात देखकर उनके साथ व्यवहार किया जाएगा। यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी एकमात्र सर्वसम्मति के नेता हैं।
मोदी जी नारियल की तरह है। बाहर से सख्त दिखते हैं और भीतर से उनका दिल कोमल है। वे जल्द ही लोगों की परेशानी को देखकर पसीज जाते हैं और फिर सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर मदद के लिए आगे बढ़ जाते हैं। स्वाधीनता के बाद देश का विकास हुआ, लेकिन आखिरी पंक्ति पर बैठा व्यक्ति हमेशा विकास से दूर रहा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को जीते नरेन्द्र मोदी जी ने हर उस आदमी की चिंता की जो विकास की रोशनी से दूर रहा। इसमें गरीब किसान, मजदूर, महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति के साथ विश्व फलक पर भारत की ताकत को और मजबूत बनाने की कोशिश की। यह पहली बार हो रहा है कि मोदी सरकार पर निरंतर लोगों का विश्वास बना हुआ है। दुनिया के सबसे बड़े नेता के रूप में पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर उनके सेवा और समर्पण की पुण्यायी का स्मरण करते हैं।
आजादी के 70 साल बाद भी भारत की बहुसंख्य जनता ने बैंक का दरवाजा नहीं देखा था या बैंक को लेकर उनके मन में भय था, उसे दूर करने के लिए प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की गई। इस योजना से आम आदमी और बैंक के बीच दोस्ती का रिश्ता कायम हो गया। यह योजना इतनी सफल रही कि इसे गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। अब तक 46125 करोड़ खाते खुले हैं जिनमें महिला खाताधारकों की संख्या 25171 करोड़ है। इसी तरह उज्जवला योजना में 9134 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा है। यह भी देश में पहली पहली बार हो रहा है। देश के ऐसे लाखों परिवार है, जिनके सिर पर छत नहीं थी उन सब लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देकर उन्हें उनका अपना पर दिलाया गया है। आने वाले वर्षों में ऐसा कोई परिवार नहीं होगा, जिनका अपना घर नहीं होगा। मोदी सरकार की प्राथमिकता में किसान सबसे ऊपर रहे हैं। स्वयं मोदी जी का मानना है कि अन्नदाता मजबूत होगा तो देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिलाओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के साथ होने वाले व्यवहार से मोदीजी हमेशा से द्रवित रहे हैं। अब जब ये फैसला करने की स्थिति में है तो एक नहीं कई फैसले करने लगे हैं। विरोधियों के हौसले पस्त हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के हक में ऐसे फैसले लिये गये हैं कि अब वे भी स्वयं को मुख्यधारा का नागरिक समझने लगे है। उन्हें भी इस बात का पहली पहली बार अहसास हो रहा है कि वे भी भारतवर्ष के नागरिक हैं। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसे शोषक कानून का खात्मा कर यह संदेश दिया कि महिलाओं पर अत्याचार कभी सहन नहीं किया जाएगा। सरकार उन महिलाओं को कानून और चिकित्सा की सुविधा प्रदान करते हैं घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं की मदद करते हैं। ऐसा होने पर से पीडि़त महिलाएं 181 पर कॉल कर सकती है। यह भी उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय मेडिकल परीक्षाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 22 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मुद्रा लोन योजना में 23 करोड़ महिलाओं को लाभ मिला है और स्टैंडअप इंडिया में 24, 800 करोड़ का लोन मंजूर कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में पहल की गई है।
प्रधानमंत्री मोदीजी का स्वप्न है कि एक देश, एक झंडा हो और कश्मीर में धारा 370 खत्म कर बता दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और जैसे अन्य प्रदेशों के लोगों का एक-दूसरे से संबंध है, वैसा ही रिश्ता अब कश्मीर का पूरे देश से होगा। यह एक कठिन फैसला था, लेकिन दृढ़ संकल्प के नेता मोदीजी के लिए कुछ भी असंभव नहीं। वे भारत माता के सच्चे सपूत हैं और इस नाते वे भारतीय संस्कृति और परम्परा के सच्चे वाहक भी हैं। शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना कर उन्होंने अपने संत ऋषियों का अनुगमन करने का संदेश दिया है। इसके पहले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की आदमकद प्रतिमा स्थापित कर युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि हमारे ऐसे नेता थे, जिन्हें हाशिये पर रखा गया। एक आदर्श राजनेता के रूप में समाज में सरदार पटेल को स्थापित करने की उनकी सकरात्मक कोशिश का पूरे भारत ने स्वागत किया। प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी जी किसी तरह का समझौता नहीं करते हैं। रॉफेल विमानों की खरीदी को विरोधी हवा देते रहे, लेकिन उनके फैसलों से देश की सुरक्षा मजबूत हुई है विक्रांत की सफलता से पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। इसी तरह ब्रम्होस मिसाइल सिस्टम के लिए करार, अर्जुन एमके-1 ए. तेजस और आइएनएस का विशाखापत्तनम बेड़ा में शामिल हो जाना बड़ी उपलब्धि है। इसी तरह युवाओं में देशप्रेम की भावना भरने के लिए उन्होंने अग्निवीर योजना का श्रीगणेश किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सीरत और सूरत दोनों ही बदल दी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने जो चाबुक चलाया है लोग कांपने लगे हैं। कोई यह बोलने की स्थिति में नहीं है कि ईडी और सीबीआई ने छापों में जो करोड़ों-अरबों की अवैध कमाई का खुलासा किया है, वह गलत है। कालेधन के खिलाफ उनकी यह मुहिम भ्रष्टाचारियों के लिए एक सबक है। एक गरीब आदमी दो जून की रोटी के लिए परेशान है और देश का एक छोटा तबका अकूत धन और सम्पत्ति का मालिक बना बैठा है। सबका साथ, सबका विकास की उनकी सोच को उनकी यह मुहिम रंग ला रही है। निश्चित रूप से मोदी जैसा प्रधानमंत्री देश को मिलना भारत और उसकी जनता का भाग्य है। उम्र के इस पड़ाव में जब लोग पककर बैठ जाते हैं, तब भी लगातार काम करते रहना और देश को आगे ले जाने की उनकी धुन हम सबको प्रेरणा देती है। नरेन्द्र मोदी की इस देश को आने वाले पचास वर्षों तक जरूरत है। उनका यह जन्मदिन उनके लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए मंगलकारी है। हम उनके यशस्वी जीवन की कामना करते हैं।
(लेखक भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)