जरूरी दवाओं से जुड़ी राहत...
   Date16-Sep-2022

vishesh lekh
आज स्वास्थ्य की दृष्टि से सबको पर्याप्त एवं पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती हैं...क्योंकि जिस तरह से शारीरिक रोग प्रतिरोधकता के लिए पोषणयुक्त भोजन जरूरी है..,ठीक उसी तरह से सबको सहज-सरल और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना भी किसी चुनौती से कम नहीं है...अनेक बार तो व्यक्ति को जब दोनों समय का भरपेट भोजन नहीं मिलता तब वह जीवन रक्षक समझी जाने वाली या अतिआवश्यक जरूरी दवाओं की उपलब्धता के लिए किस तरह से समर्थ हो इसका भी सवाल खड़ा हो जाता है...अनेक बार तो सरकार के स्तर पर स्वास्थ्य की दृष्टि से नीतिगत निर्णय लिए गए हैं...जिनका गरीब, वंचित क्षेत्र की आबादी को लाभ मिला है..,लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि पर्याप्त जानकारी न होने के अभाव में अतिआवश्यक तो सामान्य उपचार संबंधी दवाई का भी आमजन को मोटा शुल्क चुकाना पड़ता है...इसी से मुक्ति दिलाने के लिए लोगों को रोजमर्राई एवं आवश्यक दवाई उपलब्ध करवाने के लिए प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र के द्वारा देशभर में व्यापक स्तर पर सस्ती दवाओं का तंत्र निर्मित किया गया...अब सरकार ने दवाओं की राष्ट्रीय सूची में संशोधन करने के साथ मूल्य नियंत्रण कानून के दायरे में लाने की पहल की है..,यानी अब जरूरी दवाएं हर किसी की जेब पर भारी नहीं पड़ेगी...इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएनईएम) में संशोधन किया है...इसमें 34 नई दवाएं जोड़ी गई है...जबकि 26 दवाओं को हटाया गया है...आज क समय में सर्वाधिक असाध्य रोग कैंसर को माना गया है...हार्ट संबंधी उपचार के लिए भी बहुत पैसा बहाना पड़ता है..,इसलिए सरकार ने कैंसर के उपचार वाली सर्वाधिक 4 दवाओं को जोड़ा है...सूची में शामिल नई दवाएं मूल्य नियंत्रण कानून के दायरे में आएगी...जिससे सरकार नए सिरे से इनकी कीमत तय करने में समर्थ होगी...इससे दोहरा लाभ होगा एक तो दवाएं सस्ती होगी और मरीजों का खर्च घटने के साथ जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी भी रोकी जा सकेगी...ये सभी नई सूची वाली दवाइयां भारत में बनती है..,इन्हें देश में बिक्री की अनुमति के लायसेंस मिले हुए हैं...इसमें से कुछ के तो पेटेंटड दवाई के समूह में भी माना गया है...यह पहल इसलिए करना पड़ी क्योंकि दवाओं का प्रभाव कम होना, उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा होना..,बेहतर विकल्प होना, दुष्प्रभाव सामने आदि...यानी इस नई पहल से जरूरी दवाओं से जुड़ा सुधार आमजन को बड़ी राहत देगा...
दृष्टिकोण
कोरोना पर रिपोर्ट का संदेश...
वैश्विक महामारी कोरोना की पहली व दूसरी लहर ने जिस तरह से वीभत्स स्थितियां निर्मित की थी..,उन्हें कोई नहीं भूल सकता...इसमें कोई दो राय नहीं है कि महामारी रह-रहकर या कहे कि घात लगाकर हमलावर होती है...इसलिए उससे लडऩे की तैयारी इतनी आसान भी नहीं, जितनी मानी जाती है...क्योंकि नीति-नियंता और सरकारी तंत्र जिस रणनीति, शंका-अशंका के बीच महामारी से लडऩे और उसे नियंत्रित करने की पहल करते हैं...ठीक उसके विपरीत जब स्थितियां निर्मित होती है तो बेकाबू हालात होना स्वाभाविक है...यही तो कोरोना की दूसरी लहर में हुआ था...कोरोना विषाणु संक्रमण महामारी की दूसरी लहर के दौरान यदि रोकथाम नीतियों को इस स्तर पर और तेजी से लागू नहीं किया जाता तो मरने वालों का आंकड़ा बहुत भयावह हो जाता...तभी तो संसदीय समिति की रिपोर्ट में कुछ नीतिगत लापरवाही की तरफ संकेत किया गया है...लेकिन साथ यह भी माना गया है कि सरकार कोरोना महामारी और इसकी लहर के संभावित जोखिम को भले ही सटिक अनुमान लगाने में विफल रही हो...लेकिन बाद में उसे नियंत्रित करने में उसके प्रयास प्रशंसनीय है...जो कुछ भी हो.., अगर वैश्विक महामारी कोरोना के आंकड़ों को विश्व के स्तर पर देखें तो इससे मरने वालों की संख्या 60 लाख से अधिक हो चुकी हैं...फिर कितने लोग देश-विदेश में इससे अनाथ हुए, आर्थिक व मानसिक रूप से प्रभावित हुए...यह तो लंबे समय तक असर दिखता रहेगा और विश्लेषण के आधार पर उसका समाधान भी खोजा जाएगा...संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में जो कहा है वह आने वाले समय में चेतावनी के साथ एक नजीर भी है...जिसमें कहा गया है कि समिति इस बात से नाखुश है कि कई राज्य दूसरी लहर के दौरान उत्पन्न हुई अनिश्चितताओं और आपात स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने में असमर्थ रहे है...जिसके कारण 5 लाख से अधिक लोगों की भारत में मौत हुई है...यह आंकड़ा अपने आप में भयावह है...भविष्य में इसकी पुनर्रावृत्ति न हो...यही इसका सबसे बड़ा सबक और संदेश है...