सत्य-झूठ
   Date16-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
ए क सन्त की सत्य बोलने के कारण समाज में बड़ी प्रतिष्ठा थी। अपना आश्रम बनाकर जंगल में निवास किया करते थे। एक दिन की बात है, कि एक कसाई गोकस करने के उद्देश्य से एक गाय को बांधकर ले जा रहा था कि गाय प्राण बचाने के लिए कैसे भी उस कसाई के बन्धन से छूटकर भागी और उस सन्त के आश्रम की झाडिय़ों में आकर सुरक्षित मानकर छिप गई। कसाई उसका पीछा करते हुए थोड़ी ही देर में वहां आ पहुंचा और सन्त से पूछा कि महाराज! वध के लिए ले जा रही गाय, जो मेरे से छूट गई है, इधर तो नहीं आई। सन्त ने सत्य वचन बोलने का संकल्प लिया हुआ था, सो उन्होंने झाडिय़ों में अपने प्राण बचाकर छिपी गाय को उस कसाई को बता दिया। गाय फिर से कसाई के कब्जे में आ गई। कसाई ने उस गाय को मार डाला। मर्म को न जानकर किया हुआ कर्म अन्त में कर्ता के विनास का कारण बनता है। युधिष्ठिर! वह सत्यभाषी सन्त मरने के बाद नरक में गया, क्योंकि उस सत्य से जीव हिंसा हुई। राजन्! ऐसी बोली हुई वाणी और किया गया व्यवहार धर्म है, जिससे सज्जन पुरुषों की रक्षा व दुष्ट लोगों का विनाश होता है। सन्त द्वारा बोला वचन देखने में तो सत्य ही था, पर उसकी कृति से अन्तत: अधर्म ही हुआ।