बोया पेड़ बबूल का आम कहां से होय
   Date16-Sep-2022

dharmdhara
धर्मधारा
ज गत में कोई तो आनंद की लहरों से खेल रहा है, अठखेलियां कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर कोई गम के समंदर में डूबा हिचकोले खा रहा है। कोई किलकारियां मार रहा है तो कोई सिसकियां भर रहा है। किसी का दामन खुशियों से भरा है तो किसी का जीवन कांटों में उलझा है। कोई अपने स्वर्णमहल में रहकर भी उदास है तो कोई खुले आसमान के नीचे रहकर भी निहाल है। सचमुच जीवन और जगत के इस रूप को देखकर हमें कितना विस्मय व अचरज होता है! पर क्या ऐसा अनायास ही होता है या फिर इसका कोई ठोस कारण है? क्यों किसी के जीवन में सुख ही-सुख है, आनंद-ही-आनंद है, तो किसी के जीवन में शोक की सिसकियां ही भरी हैं। किसी के जीवन में सावन की रिमझिम फुहार है, तो किसी के जीवन में ज्येष्ठ की तपती दोपहरी है। ऐसा क्यों है? कुछ भी हो, पर ऐसा अनायास तो नहीं हो सकता। ऐसा अकारण तो नहीं हो सकता। इसका कोई तो कारण होगा? हमारे सुख-दु:ख का अवश्य ही कोई कारण है और वह कारण है हमारे द्वारा कभी-न-कभी बोए गए शुभ-अशुभ, अच्छे-बुरे, पाप-पुण्य आदि कर्मों के बीज, जो समय पाकर अच्छे-बुरे फलों के रूप में, हमारे जीवन में अब प्रकट हो आए हैं। भला बीज के बिना कोई वृक्ष कैसे हो सकता है? कहीं संतरे के बगीचे हैं तो कहीं सेब के, पर ऐसा सिर्फ इसलिए है, क्योंकि वहां किसी ने संतरों के, सेबों के बीज बोए हैं, पौधे लगाए हैं इसलिए वे वहां उग आए हैं। हमारे जीवन में यदि सुख है या दु:ख है तो सिर्फ इसलिए है कि अपने इस जीवन में या पूर्व के जीवन में हमने सुख या दु:ख के बीज बोए अवश्य हैं, सुख या दुख के पौधे लगाए अवश्य हैं, क्योंकि हमारे सुख-दुख का कारण हम स्वयं हैं कोई और नहीं। नागफनी के पौधे बोने पर हम कोई मीठा फल प्राप्त करने की आशा कैसे कर सकते हैं।