दृढ़ संकल्प
   Date15-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
अ मेरिका के टेनेसी राज्य में रहने वाली 'विल्मा गोल्डीन रूडाल्फ जब चार वर्ष की थी, स्कारलेट फीवर के कारण उसके दाहिने पैर में लकवा मार गया था। अब वह दिव्यांग हो गई थीं। वह बिना किसी के सहारे के चल भी नहीं सकती थीं, पर साहस की धनी उस बालिका ने नियमित टहलने और फिर दौडऩे का क्रम प्रारम्भ किया। यह अभ्यास का क्रम लगातार पांच वर्षों तक चलता रहा। वह पढऩे के लिए विद्यालय भेजी गई। वहां भी उसे दयनीय स्थिति के कारण शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के व्यंग्य सुनने पड़ते थे। एक अध्यापक 'ग्रेÓ ने तो उसे मच्छर की संज्ञा दे दी थी, पर उसके धैर्य, संकल्प और साहस ने मच्छर से शेर बना दिया। सन् 1960 में ओलम्पिक खेलों का आयोजन हुआ तो रूडाल्फ ने भी उसमें भाग लिया और एक साथ तीन स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उस लंगड़ी बालिका विल्मा की इस महान विजय पर दर्शक दंग रह गए। एक खिलाड़ी ने जब उसकी विजय का रहस्य पूछा तो उसने सगर्व उत्तर दिया-'मित्र! मेरा पैर लंगड़ा हो सकता है, पर संकल्प, साहस और नियमित अभ्यास तो लंगड़ा नहीं था।Ó