संस्कार
   Date14-Sep-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
सु रेश आधुनिक विचारधारा का नवयुवक था। वह चाहता था कि उसका विवाह किसी आधुनिक लड़की से हो, परन्तु उसके माता-पिता गाँव के सामान्य परिवार से थे, अत: उन्होंने उसका विवाह एक ऐसी ही सरल कन्या से करा दिया। उसकी पत्नी उसके साथ सदा अच्छा व्यवहार करती, परन्तु अपने पूर्वाग्रह के कारण वह उसका सदा अपमान ही करता था। मन में जन्में दूषित विचारों के कारण उसके संबंध उसी के आफिस में कार्यरत एक अन्य युवती के साथ हो गए। यह सब जानकर उसके माता-पिता को इतना कष्ट हुआ कि उनकी मृत्यु ही हो गई। माता-पिता के प्राण त्यागने के उपरांत सुरेश को लगा कि अब उसे टोकने वाला कोई नहीं है। उसने अपनी पत्नी को त्याग दिया एवं दूसरी युवती के साथ विवाह करने की सोचने लगा। तब ही उसे गंभीर तपेदिक रोग ने ग्रस्त कर लिया। सुरेश को लगा कि उससे प्रेम करने वाली युवती उसका ध्यान रखेगी, परन्तु उसके रोगी होने का समाचार मिलते ही उस युवती ने उसे तुरंत छोड़ दिया एवं किसी अन्य के साथ विवाह कर लिया। सुरेश नितांत अकेला हो गया था। ऐसे में उसकी देख-भाल करने के लिए उसकी पत्नी लौटकर आई और उसके लाख मना करने के बावजूद उसने उसका ध्यान रखकर उसे स्वस्थ कर दिया। तब सुरेश को भान हुआ कि बाहर की चमक चाहे कितनी भी लुभावनी लगे, वह संस्कारों का स्थान नहीं ले सकती।