समग्र विकास का रोड मैप...
   Date09-Aug-2022

vishesh lekh
समाज-राष्ट्र के संयुक्त प्रयासों का प्रतिफलन होता है, उस दिशा में लगातार सकारात्मक कदम बढ़ाते हुए कुछ नया हासिल करने की वह ललक जिसमें करोड़ों देशवासियों के न केवल इच्छा-आकांक्षा और स्वप्न हिलौरे लेते हैं, बल्कि उनको साकार करने की दिशा में उतरोत्तर योजनाबद्ध कार्य नीति भी जरूरी है... अगर एक दशक के मान से भविष्य की योजना और कार्यों की रूपरेखा को सामने रखकर प्रयास किए जाए तो उसके परिणाम भी सुखद आते हैं... एक समय था, जब देश में त्रिस्तरीय और पंचवर्षीय योजनाएं विकास कार्यों के मान से अमल में लाई जाती थी... लेकिन अब वह योजना आयोग का मॉडल बदल चुका है, जो देश के विकास और निर्माण का रोडमैप तैयार करता था, अब उसकी जगह नीति आयोग ही विकास की कार्य योजनाओं का न केवल खांका खींचता है, बल्कि उस पर केन्द्र से लेकर राज्यों तक से गहन मंथन के बाद बेहतर से बेहतर करने का प्रयास करता है... रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की शासी परिषद् की सातवीं बैठक में जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय मंत्रियों ने भी शिरकत की... वैश्विक महामारी कोरोना के विकट संकट से जूझते हुए भारत ने दुनिया के समक्ष एक अलग छवि के रूप में अपनी भूमिका का परिचय दिया है... इसलिए प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में भारत और वर्ष 2047 के भारत की ओर समग्रता से बढऩे का आव्हान करते हुए न केवल केन्द्र के स्तर पर बल्कि राज्यों को भी 2047 के मान से रणनीति बनाकर रोडमैप के आधार पर आगे बढऩे की सीख दी है... निश्चित रूप से भारत आज सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में दुनिया में तीसरे नंबर पर है... अगर भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का 21वीं सदी में सपना साकार करना है तो आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान में जन-जन की भूमिका महत्वपूर्ण है... नीति आयोग राज्यों के कार्य प्रदर्शन और संसाधनों के मान से उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने का भरसक प्रयास करता है, तभी तो नीति आयोग प्रत्येक निर्णय पर राज्यों सहमति-असहमति को पूरा महत्व देकर बीच का ऐसा रास्ता निकालता है, जिससे कहीं पर भी व्यवधान न हो... क्योंकि अंतत: किसी नीति या निर्णय पर अमल करने के लिए राज्यों की मन:स्थिति भी जरूरी है... गत दिनों महंगाई को लेकर जिस तरह से राज्यों ने विरोधी बयान दिए, उसके बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री को कहना पड़ा कि नीति आयोग की बैठक में राज्यों ने इस तरह के खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी दरें बढ़ाने का समर्थन किया था... बात सही भी है कि अगर पेट्रोल-डीजल से लेकर अन्य तरह की वस्तुओं पर कोई टैक्स लिया जाना है तो उसका केन्द्र-राज्य में बंटवारा कितना और कैसा होगा, इस पर विवेकपूर्ण चर्चा जरूरी है... और इस मामले में केन्द्र की मोदी सरकार लगातार संवाद के जरिये इस बात को आगे बढ़ा रही है, ताकि विकास और निर्माण का रोडमैप बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके...
दृष्टिकोण
राजग की जीत का संदेश...
अंतत: उपराष्ट्रपति पद पर राजग की ऐतिहासिक जीत का रिकार्ड बन ही गया, क्योंकि बिखरे हुए विपक्ष के कारण भाजपा को 74 फीसदी से अधिक मत मिले हैं... जो अपने आप में उपराष्ट्रपति पद पर विराजमान होने वाले जगदीश धनखड़ की व्यक्तिगत छवि और भाजपानीत राजग गठबंधन की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा माना जा सकता है... इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अब आने वाले समय में भाजपा को संसद में सभापति के रूप में एक ऐसे स्पष्ट, तार्किक और सख्त व्यक्ति का मार्गदर्शन मिलेगा, जो नियमों के पालन को लेकर थोड़े भी रियायती नहीं है... क्योंकि उनकी छवि पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के रूप में न केवल तृणमूल के साथ ही संपूर्ण विपक्ष में बल्कि देशवासियों ने भी देखी है... 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीश धनखड़ ने 346 वोट से संप्रग उम्मीदवार माग्र्रेट अल्वा को हराया है... दोनों सदनों के 725 सांसदों ने वोट डाले, जिसमें धनखड़ को 528, अल्वा को 182 मत मिले... 15 वोट रद्द हुए... यानी धनखड़ को 74.36 फीसदी वोट मिले हैं, जो वैंकेया नायडू के 68 फीसदी से बहुत अधिक है... लेकिन वे फिर भी कांग्रेस के के.आर. नारायणन के 1992 में 99.86 फीसदी से पीछे हैं... तब नारायणन को 700 और जोगिंदर सिंह को 1 वोट मिला था... और 10 वोट अवैध घोषित हुए थे... चार बार उपराष्ट्रपति पद पर निर्वाचन निर्विरोध हुआ है... लेकिन इस बार धनखड़ ने कांग्रेस के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराकर न केवल भाजपा की रणनीति को मजबूती दी है, बल्कि विपक्ष के लिए इसे बड़ी चुनौती के रूप में भी देखा जाना चाहिए...