हेराल्ड से हैरान-परेशान कांग्रेस...
   Date05-Aug-2022

vishesh lekh
कांग्रेस पार्टी नेतृत्व विहीनता के चलते 2014 के बाद से लगातार रसातल की ओर बढ़ रही है...इस दौरान कई पुराने और प्रतिबद्ध कांग्रेसियों ने भी कांग्रेस को सुधारने की पहल की है..,लेकिन उन्हें बागी या कहे असंतुष्ट धड़ा करार देते हुए जी-23 समूह के नाम से पहचाना जाने लगा...लेकिन इस दौरान सोनिया-राहुल-कांग्रेस ने कांग्रेस की मजबूती के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया या पहल की...जिससे कांग्रेस को मजबूती मिले..,तभी तो कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करने के लिए सोनिया-राहुल की जुगलबंदी और कांग्रेसियों की अकर्मण्यता ही पर्याप्त है..,लेकिन सोचने वाला बिंदु यह भी है कि जो काम कांग्रेस को सड़क पर करना चाहिए वह उसे संसद की तरफ खींच कर लाती है और संसद में जिन मुद्दों पर उसे चर्चा करना चाहिए उसे सड़क की तरफ लेकर दौड़ती है..,क्योंकि हेराल्ड मामले में गांधी परिवार ही नहीं पूरी कांग्रेस हैरान-परेशान है...प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राहुल गांधी से 5 दिन में कुल 45 घंटों, जबकि सोनिया गांधी 3 दिन में 12 घंटे सवाल-जवाब करके इस बात के पुख्ता प्रमाण जुटा लिए है कि नेशनल हेराल्ड के मामले बहुत कुछ गड़बडिय़ां सतह पर आ चुकी है...धनशोधन (निवारण) अधिनियम की आपराधिक धाराओं के तहत अब छापेमारी का काम भी शुरू हो चुका है...नेशनल हेराल्ड समेत 12 जगहों पर जांच एजेंसी ईडी ने छापे मारे, जरूरी दस्तावेज भी जब्त किए है..,क्योंकि इस पूरे अनियमितता मामले में 2000 करोड़ की हेराफेरी का आरोप 90 करोड़ कर्ज एजेएन को देने का दावा किया जा रहा है...और सुब्रह्मण्यम स्वामी इस मामले को 2012 में उठाया था...तभी तो अगस्त 2014 में ईडी ने स्वत: संज्ञान लेकर धनशोधन का मुकदमा दर्ज किया था...अब अगर हेराल्ड हाउस में यंग इंडिया के ऑफिस को भी ईडी ने सील कर दिया है तो यह इस बात का संकेत है कि पूरे मामले में बहुत सारी गड़बडिय़ां है जिन्हें अगर समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ संभव है...जानकारों का तो यहां तक कहना है कि सोनिया-राहुल को ईडी कभी भी हिरासत में ले सकती है...जब इस तरह की नौबत आ चुकी है तब कांग्रेस का सदन में हो-हल्ला करना यहां तक कि सड़कों पर बौखलाएं कांग्रेसियों का केंद्र सरकार पर उल्लजुलूल आरोप लगाना भी यह बताता है कि कांग्रेसी हताश, निराश होकर इस तरह के आरोप लगा रहे है जिनका कोई जमीनी आधार नहीं...अगर सोनिया-राहुल इस मामले में पूर्णत: निर्दोष है तो किसी भी तरह की जांच का सामना करने में परेशानी क्या है..? इससे भी बढ़कर सवाल तो यह भी है कि कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन तो कर रही है..,लेकिन इस मामले में तार्किक बचाव-पक्ष सामने नहीं रख पाई...ऐसे में इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि जब तक दोनों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा...जांच को अंतिम परिणिति तक पहुंचाने असंभव है...
दृष्टिकोण
अब ताइवान-चीन की भिड़ंत...
रूस-यूक्रेन की लंबे समय से चल रही युद्ध भिड़ंत का फिलहाल कोई अंतिम नतीजा सामने नहीं है..,लेकिन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस विवाद ने बहुत धक्का लगाया है...क्योंकि खाद्यान्न उत्पादन और निर्यातक के रूप में यूक्रेन की महती भूमिका है तो दूसरी तरफ रूस की भूमिका भी पेट्रोलियम पदार्थ और हथियारों की आपूर्तिकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण है...लेकिन दोनों देशों के आपस में भिडऩे का जो हिंसक नजारा हम 6 माह से देख रहे है उसका अंतिम सत्य तो यही है कि पूरा विश्व इन दोनों देशों के मामले में भारत को छोड़कर शेष अन्य तटस्थ भूमिका में रहे...चीन ने तो यूक्रेन में रूस के कदम का समर्थन किया...शायद कूटनीतिक रूप में यह चीन को ध्यान भी था तभी तो अब ताइवान को घेर चुका है...क्योंकि गत दिनों अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी चीन की चेतावनी या कहे कि खुल्ली धमकी के बावजूद मंगलवार को ताइवान पहुंच चुकी थीं...अमेरिका के 24 आधुनिक लड़ाकू विमानों का घेरा बनाकर नैंसी को सुरक्षा दी गई थी..नैंसी के इस ताइवान दौरे से चीन बौखला गया और यहां तक धमकी दे डाली कि अमेरिका आग से न खेले...अब चीन ने ताइवान से नैंसी पेलोसी के निकलते ही अपने 27 फाइटर जेट ताइवान की सीमा में घुसा दिए...मामला शनै: शनै: युद्ध की तरफ बढ़ रहा है...इसमें कोई दो राय नहीं है कि ताइवान भी अपने नागरिकों व सैनिकों के जरिये गुरिल्ला युद्ध टुकड़ी का अभ्यस्त है...35 लाख से अधिक आबादी वाले ताइवान में बहुत सारे लड़ाकें है जो चीनी सेना का आमना-सामना करने के लिए तैयार है...फिर चीन का वर्चस्ववादी रूख हमेशा से दूसरों की सीमाओं को कब्जा करने का रहा है...देखने लायक होगा कि चीन की इस खुराफात पर वैश्विक मंच क्या कहता है..?