चुनौती और दृढ़ निश्चय
   Date05-Aug-2022

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ती र्थराम का गणित उनका प्रिय विषय था। उनकी एक आदत थी कि प्रश्न पत्र में यदि लिखा होता- कोई पांच प्रश्न हल करो, तो वे सभी प्रश्न हल कर देते। वे नहीं चाहते थे कि कोई प्रश्न उन से हल न हो। गणित का प्रश्न-पत्र दूसरे दिन था। शाम से तीर्थराम गणित के प्रश्न हल करने में जुटे थे किन्तु, एक प्रश्न था कि हल ही नहीं हो रहा था। फिर भी वे बड़ी लगन और विश्वास के साथ उसे हल करने में जुटे रहे। उनको एक प्रश्न के लिए व्यग्र हुए देख उनके साथी ने कहा- 'तीर्थराम, क्या केवल यही प्रश्न परीक्षा में आना है? इसे छोड़कर दूसरे प्रश्नों की ओर ध्यान क्यों नहीं देते?Ó तीर्थराम ने उत्तर दिया-'समस्या इस प्रश्न के परीक्षा में आने की नहीं है। बात यह है कि इस प्रश्न ने मुझे चुनौती दी है। मुझे विश्वास है कि मैं इसे हल कर ही लूंगा।Ó प्रयास करते करते सवेरा हो गया। अब तो परीक्षा प्रारम्भ होने में केवल दो घंटे शेष बचे थे। अब तो तीर्थराम यह संकल्प कर प्रश्न हल करने बैठ गए, कि प्रश्न हल होने पर ही यहां से हिलूंगा। अभी पांच मिनट भी न हुए थे कि प्रश्न हल हो गया। मित्र ने कहा- 'यह तो प्रश्न हल करने का बहुत बढि़या उपाय है। यदि प्रश्न हल न होता तो क्या तुम परीक्षा देने न जाते?Ó रामतीर्थ ने उत्तर दिया- 'जो बात मुझे चुनौती देती है, मैं उसे स्वीकार करता हूं। यदि मैं उसका उत्तर देने में समर्थ नहीं तो मेरे जीवन का क्या लाभ?Ó मित्र उनके विश्वास और लगन को देखकर प्रसन्न हुआ।