एक सद्, विप्रा बहुधा वदन्ति
   Date05-Aug-2022

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ई श्वर विश्व मनीषा की शीर्ष जिज्ञासा है। ईश्वर अधिकांश विश्व की आस्था है, लेकिन दर्शन विज्ञान की चुनौती भी है। आस्था प्रश्नाकुल नहीं होती। जिज्ञासुओं के लिए प्रश्नाकुलता ही तीर्थयात्रा है। ईश्वर अप्रत्यक्ष है, लेकिन अनेक भारतीय चिंतक उसे सिद्ध बताते हैं। ऋग्वेद दुनिया का प्राचीनतम शब्द साक्ष्य है। ऋग्वेद सैकड़ों ऋषियों के सूक्तों का संकलन और यजुर्वेद भी। ऋषि कथनों में वैचारिक विविधता है, लेकिन ईश्वर का उल्लेख नहीं। यजुर्वेद में ईश या ईशान शब्द अवश्य आया है पर इसका अर्थ सर्वव्यापी चेतन है। सर्वोच्च शासक नहीं। आस्थालु एक ही ईश्वर मानते बताते हैं, लेकिन सभी देशों व आस्थाओं के ईश्वर एक जैसे नहीं है। अरब आस्था का ईश्वर सर्वोच्च शासक है। उनकी मान्यता के अनुसार ईश्वर ने विश्व बनाया। वह गलत काम पर दण्ड देता है, अच्छे काम का इनाम देता है, उपासना से खुश होता है। उस ईश्वर पर ईमान लाने वाला व्यक्ति प्रशंसनीय हैा। ईमान न लाने वाला सत्कर्मी भी पुरुस्कार के योग्य नहीं है। वह क्रोध भी करता है। प्रसन्नता या क्रोध मनुष्य के गुण अवगुण है। वैदिक काल में ईश्वर जैसी सत्ता का उल्लेख नहीं है। पुराणों के रचनाकाल में ईश्वर की सत्ता का आख्यान मिलता है। फिर मजहब और रिलीजन भारत आए। उनकी आस्था के ईश्वर से भारतवासियों का परिचय हुआ। संप्रति भारत का ईश्वर भी कमोबेश वैसे ही सर्वशक्तिमान जान पड़ता है।
अपनी-अपनी आस्था। सभी आस्थाएं और श्रद्धालु का आदरणीय है। अनेक भारतीय विद्वानों ने वैदिक कालमें भी ईश्वर आस्था या अनुभूति के तर्क दिए है। वे ऋग्वेद के चर्चित एक मंत्र का हवाला देते हैं। मंत्र में कहा गया है कि सत्य एक है, विद्वान उसे इन्द्र वायु अग्नि आदि नामों से पुकारते है, एक सद्, विप्रा बहुधा वदन्ति। इस मंत्र में सत् को एक बताया गया है। सत् सम्पूर्ण एक चेतना है और सत्य या सत् शासक नहीं होता। अस्तित्व एकमात्र सत्य है। असत्य का अस्तित्व नहीं होता। वह भाषा या बोली में अवश्य होता है। असत्य का अर्थ है - जो नहीं है। सम्पूर्ण अस्तित्व एकमात्र सत्य है। तब सत्य किस पर शासन करेगा। सत्य शासन नहीं हो सकता। वह सत्य सभी कालों में एक रहता है। डॉ. राधाकृष्णन ने याद दिलाया है कि ऋग्वेद में वरुण देवता का कामकाज शासक जैसा है। एक सर्वोच्च अदृश्य ईश्वर के पक्ष और विपक्ष में अनेक विचार है। ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता पर भी प्रश्न है कि उसके श्रेष्ठ शासन में शोषण, हिंसा और अव्यवस्था क्यों है? पक्ष में कहा गया है कि विश्व एक व्यवस्थित संरचना है।
इसे बनाने और चलाने वाला कोई तो होना ही चाहिए। वैदिक ज्ञान में इस व्यवस्था को ऋत कहा गया है। अमेरिका में इस विचार को इंटेलीजेन्ट डिजाइन कहा गया। सृष्टि इन्टेलीजेन्ट डिजाइन है भी।