सुलभ न्याय की प्रतीक्षा...
   Date02-Aug-2022

vishesh lekh
लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संवैधानिक व्यवस्था के संरक्षण-संवर्धन और सुदृढ़ीकरण में भारतीय न्याय पालिका की महती भूमिका है... क्योंकि समय-समय पर न्याय मंदिर द्वारा लिए गए फैसले और दी गई व्यवस्था अनेक तरह की समस्याओं का समाधान ही नहीं करती, बल्कि आमजन में यह विश्वास भी जगाती है कि उनकी बात को सुनने वाला और उनके अधिकारों की पैरवी करने वाला कोई तो है... अनेक बार सरकार के स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जाने के बावजूद ऐसा मकडज़ाल होता है, जो उस व्यवस्था को सकारात्मक तरीके से आगे नहीं बढऩे देता, लेकिन उस पर न्याय व्यवस्था द्वारा लिया गया फैसला अपना प्रभावी असर दिखाता है... न्याय का आसानी से अर्थात् सुलभ तरीके से और समय पर मिलना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देर से मिला न्याय भी किसी अन्याय से कम नहीं है... इसलिए यह जरूरी है कि न्याय व्यवस्था को और तीव्र गति से अपनी कार्यपद्धति को बढ़ाना होगा, ताकि न्याय की आश में और सहज-सरल और सुलभ तरीके से न्याय की उम्मीद में कोई दम न तोड़े... यह जरूरी इसलिए भी कि 4 लाख 88 हजार कैदी 2020 में जेलों में कैद थे, 3 लाख 71 हजार कैदी इनमें से विचाराधीन है... इतने बड़े मानव श्रम को न्याय की देरी के चलते न केवल बर्बाद किया जा रहा है, बल्कि इन्हीं के द्वारा देश के खजाने को भी पलीता लगता है... इसलिए न्याय प्रत्येक व्यक्ति तक समय पर और आसानी से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि न्याय व्यवस्था की भी बड़ी जवाबदेही बन जाती है कि वह किस तरह से अतिरिक्त समय निकालकर न्याय प्रक्रिया में विचाराधीन मामलों को सुनकर त्वरित फैसला देने की पहल करे... क्योंकि अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहली बैठक में प्रधानमंत्री और देश के सर्वोच्च न्यायाधीश एन.वी. रमन्ना ने संयुक्त रूप से जो कहा है वह यही है कि अभी भी बहुत कम लोग अदालतों में पहुंच पा रहे हैं या तो उनके पास न्याय पाने के लिए आवश्यक धन की कमी है या फिर उन्हें उन न्यायालयीन प्रक्रिया की पेचीदगियों के चलते उन्हें न्याय समय पर मिलने में आशंका है... इसका समाधान सरकार और न्यायालय दोनों मिलकर कर सकते हैं... क्योंकि अधिकतर लोग आवश्यक माध्यमों एवं जागरूकता के अभाव में मौन रहकर भी पीड़ा सहते हैं और न्याय उनसे दूर ही रहता है... यह अच्छी पहल है कि देश में 776 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रिहाई के काम में जुटे हैं, ताकि विचाराधीन कैदियों के संबंध में त्वरित तरीके से निर्णय लिया जा सके... इसीलिए कैदियों की पहचान के लिए अभियान चलाकर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के तहत गरीबों को न्याय का रास्ता दिखाने की पहल हो रही है... यह न्याय पालिका की सक्रियता है कि कोरोनाकाल में शुरू हुई प्रक्रिया के तहत ई-कोर्ट मिशन से एक करोड़ से अधित मामलों की सुनवाई हुई है, यानी न्याय प्रक्रिया को सहज-सरल करने की प्रतिक्षा अब खत्म होने लगी है...
दृष्टिकोण
विकास को मिलेगी गति...
किसी भी शहर अथवा राज्य के विकास का आधार उसकी वह परिवहन व्यवस्था है, जो विकास एवं निर्माण को नया आयाम देने में सक्षम है... क्योंकि बेहतर सड़क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के बिना आज विकास के नए आयाम तय करना आसान नहीं है... तभी तो देश में सड़क व पुल निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कार्यों को इस तरह से गति दी कि आज प्रत्येक क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ एवं मजबूत होती नजर आ रही है... सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को इंदौर में 2300 करोड़ की लागत से कुल 119 किमी लंबाई की 6 सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया... यह अपने आप में विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है... इसमें कोई दो राय नहीं कि सड़कों के निर्माण और इससे जुड़ी अधोसंरचनाओं में आधुनिक तकनीकों का जो भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है, उसी का परिणाम है कि आज सड़क निर्माण का लक्ष्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय न केवल समयसीमा में पूर्ण कर रहा है, बल्कि अनेक निर्माण कार्य तो निर्धारित अवधि से पहले हुए है... अगर गडकरी यह दावा करते हैं कि 2024 तक मप्र में 4 लाख करोड़ के काम पूरे हो जाएंगे तो यह उनका केवल राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि एक लोकसेवक के रूप में वचनबद्धता है, जिसे वे हर हाल में पूरा करेंगे... पूरे देश में इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए केन्द्र सरकार के प्लान की भी उन्होंने योजना सबके सामने रखी... मप्र में बेहतर हाईवे बनाने का जो लक्ष्य उन्होंने रखा है, वह परिवहन के मामले में उम्मीद जगाता है...