अमृतकाल और गौरव...
   Date17-Aug-2022

vishesh lekh
भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का गौरवशाली अवसर इतिहास में दर्ज हो गया है... लगभग हर मोहल्ले में कोई न कोई विशेष आयोजन और हर घर तिरंगा अभियान तो कुल मिलाकर बहुत यादगार रहा है... इस खास पड़ाव पर जितना महत्वपूर्ण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उद्बोधन है, उतनी ही चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की हुई है... स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित कर दिया है... इस मिट्टी में न केवल लोकतंत्र की जड़ें बढ़ी हैं, बल्कि समृद्ध भी हुईं... राष्ट्रपति ने कहा कि देश का विकास अधिक समावेशी होता जा रहा है और क्षेत्रीय असमानताएं भी कम हो रही हैं... राष्ट्रपति ने गौरव के साथ याद किया कि अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था, लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया... राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने पहले उद्बोधन से न केवल देशवासियों को प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें गर्व का भी एहसास कराया है...पंद्रह अगस्त की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से संबोधन के दौरान भ्रष्टाचारियों पर जमकर प्रहार किया... उन्होंने इसके खिलाफ जंग में देशवासियों का सहयोग भी मांगा... भाई-भतीजावाद पर भी चिंता जताई और कहा कि राजनीति के अलावा भी यह कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है... प्रधानमंत्री के इस उपयोगी उद्बोधन के अनेक अर्थ निकाले जा रहे हैं, प्रशंसा हो रही है, तो आलोचक भी कम नहीं हैं... भ्रष्टाचार देश में अगर बढ़ रहा है, तो किसकी जिम्मेदारी बनती है..? भ्रष्टाचार को कौन खत्म करेगा..? आजादी के 75वें साल में इस सवाल का उठना अपने आप में गंभीर बात है... आजादी के स्वप्न में भ्रष्टाचार से मुक्ति भी शामिल थी... आज भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री अगर चिंता जता रहे हैं, तो देश अच्छी तरह से वस्तुस्थिति को समझ रहा है... प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही कहा है कि किसी के पास रहने को जगह नहीं और किसी के पास चोरी का माल रखने की जगह नहीं है... नि:संदेह, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ हमें मिलकर कदम उठाने पड़ेंगे... खैर, किसी देश को किन्हीं समस्याओं पर थम नहीं जाना चाहिए... समाधान तलाशते हुए आगे बढऩा चाहिए... प्रधानमंत्री ने देश को पांच संकल्प दिए हैं... उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब तक हमें इन संकल्पों को पूरा करना है... पहला संकल्प है, विकसित देश बनना... दूसरा संकल्प, देश के किसी कोने में गुलामी का अंश न रह जाए... उन्होंने सही कहा है कि हमें औरों के जैसा दिखने की कोशिश करने की जरूरत नहीं है... हम जैसे भी हैं, वैसे ही सामथ्र्य के साथ खड़े होंगे...
दृष्टिकोण
आतंकवाद का खात्मा...
जम्मू-कश्मीर में जब लोग नए उत्साह से स्वतंत्रता दिवस मनाने में लगे हैं, तब आतंकवादियों की निर्ममता अक्षम्य है। बांदीपुरा में आतंकियों ने बिहार के एक प्रवासी मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी... कायरों ने आधी रात को हमला किया और मधेपुरा निवासी युवा मोहम्मद अमरेज की हत्या कर दी... एक गरीब मजदूर की हत्या कराने वाला यह कौन सा मजहब है..? बिहार से रोजी-रोटी कमाने गए इस मजदूर के भाई के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह भाई के शव को अपने गृहनगर ले जाए... यह बार-बार कहा जाता है कि हिंसक तत्व गरीबों को निशाना इसलिए बनाते हैं, क्योंकि इससे बाकी प्रवासियों में दहशत फैलती है... देश में किसी को भी किसी राज्य में रहने और रोजी-रोटी कमाने का हक है, पर कश्मीर में बचे हुए आतंकी नहीं चाहते कि बाहर से लोग कश्मीर में आएं... ऐसे आतंकियों के सफाए के अलावा और क्या रास्ता है..? घाटी में नई परिस्थितियों में बाहर से लोगों का आना बढ़ेगा, आर्थिक सक्रियता बढ़ेगी, श्रम बल बढ़ेगा, इसे अब रोकना मुश्किल है... अत: सरकार की जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है... वहां बहुत हद तक हिंसा में कमी आई है, लेकिन इधर जो हमले हुए हैं, उनका मकसद 15 अगस्त के माहौल को खराब करना है... कश्मीर में जिस तरह से विभिन्न स्कूलों और संस्थाओं से अमृत महोत्सव के आयोजन की खबरें आ रही हैं, उससे आतंकी बौखला गए हैं... उनकी ताजा कायरता का हिसाब जरूर होना चाहिए... गौर करने की बात है कि फरवरी 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सेना के शिविर पर बुधवार को पहला फिदायीन हमला भी हुआ है...