देश में सामूहिक चेतना का पुनर्जागरण
   Date17-Aug-2022

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आजादी के अमृत महोत्सव पर लालकिले से प्रधानमंत्री ने कहा
नई दिल्ली ठ्ठ 16 अगस्त (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लाल किले से अपने संबोधन में कोरोना तालाबंदी के दौरान जनता कफ्र्यू और थाली-ताली अभियान के आलोचकों का करारा जवाब दिया। उन्होंने देश में आजादी के अमृत वर्ष में चलाए जा रहे हर घर तिरंगा अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में सामूहिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ है। ये चेतना का जागरण ये हमारी सबसे बड़ी अमानत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा, देश का हर नागरिक बदलाव देखना चाहता है, लेकिन उसे इंतजार नहीं चाहिए। अपनी ही आंखों के सामने देश का नागरिक सपनों को पूरा होते देखना चाहता है। कुछ लोगों को इसके कारण संकट हो सकता है, लेकिन जब आकांक्षी समाज होता है तो सरकारों को भी तलवार की धार पर चलना पड़ता है। चाहे केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार हो, सभी को इस समाज की चिंता करनी होगी। उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम इंतजार नहीं कर सकते। इस समाज ने लंबे अरसे तक इंतजार किया है, लेकिन अब वह अपनी आने वाली पीढ़ी को इंतजार करने के लिए मजबूर करने को तैयार नहीं है। इसलिए अमृत काल की पहली प्रभात आकांक्षी समाज के सपने को पूरा करने का सुनहरा अवसर देती है। हमने पिछले दिनों देखा कि भारत में कैसे सामूहिक चेतना पुनर्जागरण हुआ।
जब देश दीया जलाता है तो चेतना की अनुभूति होती है
मैं समझता हूं कि चेतना का पुनर्जागरण हमारी सबसे बड़ी अमानत है। 10 अगस्त तक किसी को पता भी नहीं होगा कि देश के अंदर कौन सी ताकत है, लेकिन पिछले तीन दिनों में देश जिस तरह से तिरंगा लेकर चल पड़ा है, उसने दिखा दिया है कि लोग कितने तत्पर हैं। जब देश जनता कफ्र्यू का साथ देता है, कोरोना वॉरियर के साथ खड़ा हो जाता है और उन्हें दीया जलाकर संबल देता है तो चेतना की अनुभूति है। दुनिया में जब यह बहस चल रही थी कि टीका लेना है या नहीं, उस दौर में हमारे देश में 200 करोड़ डोज लग जाती हैं।
अपनी ही पीठ थपथपाते रहे हों तो हमारे सपने दूर चले जाएंगे
आजादी के इतने दशकों बाद पूरे विश्व का भारत के प्रति देखने का नजरिया बदल चुका है। विश्व भारत की तरफ गौरव और अपेक्षा के साथ देख रहा है। विश्व का यह बदलाव हमारे संकल्पों का प्रतीक है। दुनिया हमारी तरफ देख रही है। दुनिया की उम्मीदों को पूरा करने का सामथ्र्य कहां है? यह उसे दिखने लगा है। मैं इसे त्रिशक्ति के रूप में देखता हूं, यह है आकांक्षाओं की, पुनर्जागरण की और दुनिया की उम्मीदों की। 130 करोड़ देशवासियों ने कई दशकों के अनुभव के बाद स्थिर सरकार का महत्व क्या होता है, यह समझा है। चाहे स्वच्छता का अभियान हो या फिर गरीबों के कल्याण का काम हो, देश पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन आजादी के अमृत काल में यदि हम अपनी ही पीठ थपथपाते रहे हों तो हमारे सपने कहीं दूर चले जाएंगे। इसलिए 75 साल का कालखंड कैसा भी रहा हो, लेकिन आज जब हम अमृत काल में प्रवेश कल रहे हैं तो अगले 25 साल हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।