व्रत और संकल्प की रक्षा का सूत्र 'रक्षाबंधन' पर्व
   Date11-Aug-2022

dharmdhara
धर्मधारा
र क्षा बंधन का पर्व भारत के मुख्य त्योहारों में से एक है यह सदा किसी धार्मिक अथवा पवित्र व्यक्ति द्वारा कराई जाती है ओर सूत्र बंधवाने वाला व्यक्ति संकल्प करने वाले को दक्षिणा भी देता है। इसी का रूपान्तर रक्षाबंधन है। इतिहास में किसी समय कन्याएं, बहनें धार्मिक दृष्टिकोण से महान अथवा उच्च बनी होंगी और उन्होंने 'ब्राह्मणÓ पद अथवा ब्राह्मी स्थिति प्राप्त की होगी, तब उन्होंने नर-नारियों को जो कि आत्मिक रूप से भाई-भाई हैं, कुछ नियमों अथवा व्रतों की प्रतिज्ञा या संकल्प लेने के लिए सूत्र बांधा होगा और तिलक दिया होगा और भाइयों ने उन्हें इस शुभकार्य के लिए उपहार दिया होगा, तभी तो आज ब्राह्मण भी यजमानों को राखी बांधते हैं और बहनें भी सूत्र बांधती हैं। एक ही त्योहार पर दोनों द्वारा एक ही रस्म का अदा किया जाना उपरोक्त रहस्य ही का सूचक है। उसी समय की जब पुनरावृत्ति हो रही है। रक्षा बंधन का वास्तविक रहस्य - वास्तव में रक्षा बंधन की शुभ रस्म शुरू तो किसी अन्य अभिप्राय से हुई थी परन्तु समयान्तर में रक्षा और बंधन शब्द का गलत अर्थ ले लेने के कारण इसका स्वरूप बदल गया। सबसे पहली भूल तो यह हुई कि रक्षा शब्द का अर्थ शारीरिक रक्षा मान लिया गया। यद्यपि रक्षा का एक अर्थ शारीरिक रक्षा भी है परन्तु रक्षा शब्द के और भी अर्थ हैं और जिस शब्द के अनेक अर्थ हों उसका जो अर्थ प्रसंग के अनुसार ठीक बैठता हो, वहीं लेना बुद्धिमता है। अब जानने के योग्य एक बात यह है कि रक्षा शब्द का एक प्रयोग तो गम्भीरता पूर्ण किसी रहस्य की रक्षा के लिए भी होता है। अपने मन में किसी बात को सम्भाल कर रखना, उसे अन्य लोगों को न बताना यह रहस्य रक्षा है। संस्कृत भाषा में रहस्यम् रक्षति अर्थात् रहस्य की रक्षा करता है उसका प्रयोग हुआ है। वहां पर रक्षा का अर्थ 'शारीरिक रक्षाÓ लेना भूल होगा। इसी प्रकार आपदा के समय के लिए कुछ धन बचाकर अथवा सम्भालकर रखना यह 'धन रक्षाÓ है। पहले, जब लोग भूत-प्रेत में विश्वास रखते थे, वे रात्रि को एक दीपक जलाकर रखते थे जिसे वे 'रक्षा प्रदीपÓ वे कहते थे। पुराने जमाने में लोग एक प्रकार की तावीज पहनते थे। जिसको वे रक्षा भूषण अथवा रक्षामणि भी कहते थे। इसी तरह अपने धर्म में स्थित रहना, धर्म से न गिरना यह धर्म की रक्षा है। तो जबकि रक्षा शब्द कई प्रकार से प्रयुक्त होता है, तो हमें जानना होगा कि रक्षाबंधन में रक्षा शब्द का अर्थ क्या है। जैसे 'रक्षाÓ शब्द कई अर्थों में प्रयोग होता है, वैसे ही बंधन में अथवा बन्ध शब्द के भी अनेक अर्थ है। उदाहरण के तौर पर जब हम कहते हैं, कि हमारी 'आश बंध गईÓ तो उस वाक्य में बन्ध शब्द का अर्थ किसी रस्सी या जंजीर से किसी को बांधना नहीं होता। किसी समझौते या प्रतिज्ञा में किसी को शामिल करना यह भी एक बंधन कहलाता है। अत: देखना होगा कि रक्षा बंधन में बन्धन शब्द किस अर्थ में प्रयोग हुआ है। इस त्योहार के पीछे रहस्य तो यह है कि सृष्टि की आदि ( अर्थात् स्थापना काल) में परमपिता परमात्मा शिव और प्रजापिता ब्रह्मा के निर्देश से सच्चे ब्राह्मणों ने तथा शिव-शक्ति रुपा बहनों ने मनुष्यों को यह बंधन बांधा था कि वे पवित्र बनें अर्थात् काम, क्रोधादि पर विजय प्राप्त करें।