गांधी का गिरोह
   Date10-Aug-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
ए क बार रविशंकर महाराज ने भयंकर आतंकवादी दरस्युओं से मिलने का निश्चय किया और जहां उनके मिलने की संभावना थी, वहां अंधेरी रात में चल दिए। डाकुओं ने उस अपरिचित को रोकने के लिए बंदूक तानी तो वे खिलखिलाकर हंस पड़े और बोले - 'मैं भी तुम्हारी बिरादरी का ही डाकू हूं।Ó दस्युओं ने बंदूक नीची कर ली और पूछा- किस गिरोह के हो? कहां रहते हो? महाराज ने कहा- मैं गांधी के गिरोह का हूं। दस्युओं को पास बैठाकर उन्होंने बड़े मार्मिक शब्दों में कहा- हमें तो पराधीन बनाने वालों के विरुद्ध शूरता प्रकट करना चाहिए। निरपराध देशवासियों को लूटने से क्या लाभ? उनके प्रभाव से कितने ही डाकुओं ने यह कार्य छोड़ दिया और उपयोगी कार्य करने लगे।