कट्टरता और पीएफआई...
   Date01-Aug-2022

vishesh lekh
पीएफआई के कट्टर हिंसक मंसूबे अब मुस्लिमों को भी बेचैन करने लगे हैं... कर्नाटक में एक स्थानीय भाजपा नेता की हत्या की घटना से फिर यही रेखांकित हुआ है कि अगर समय रहते आपराधिक तत्वों पर लगाम लगाने में सरकार और पुलिस नाकाम रहती है तो उसके क्या नतीजे हो सकते हैं... दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में भाजपा युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेत्तारू शाम को जब दुकान बंद कर अपने घर की ओर लौट रहे थे, तब कुछ मोटरसायकल सवारों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया और उनकी जान ले ली... हत्या की इस घटना को जिस तरह अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि इसके लिए पूरी तैयारी गई थी और इसके पीछे गहरी साजिश है... फिलहाल पुलिस ने हत्या में संलिप्तता के शक के आधार पर दक्षिण कन्नड़ जिले से ही दो युवकों को गिरफ्तार किया और इसके अलावा इक्कीस संदिग्धों से पूछताछ की है... मगर अब तक इस हत्या को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों का पकड़ में नहीं आना और इसमें कुछ खास संगठनों का हाथ होने की आशंका ने एक नई चिंता पैदा कर दी है... दरअसल, प्रवीण नेत्तारू की हत्या के बाद स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पीएफआई जैसे कुछ अतिवादी माने जाने वाले संगठनों का हाथ बताया और कहा कि पुलिस और सरकार इनके खिलाफ जल्दी कार्रवाई करे... हालांकि अब तक हत्या की मुख्य वजह के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, मगर पुलिस को शक है कि यह घटना बीते हफ्ते बेल्लारे में एक मजदूर की हत्या का बदला हो सकती है... यह आशंका भी जताई जा रही है कि प्रवीण नेत्तारू ने कुछ समय पहले बर्बरता से मारे गए कन्हैयालाल को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी राय जाहिर की थी और इसी से पीएफआई सहित कुछ अन्य कट्टर संगठन नाराज थे... यह संदेह इसलिए भी है कि हत्या की यह वारदात जिस इलाके में हुई है, वहां से केरल की सीमा ज्यादा दूर नहीं है... ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं कि पीएफआई और इस तरह के अन्य संगठनों को केरल में ही अपनी जमीन मजबूत करने का मौका मिला है और ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने के मामले में वहां की सरकार ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती है... नतीजा अब इस रूप में सामने आ रहा है कि उन संगठनों की गतिविधियों का दायरा फैल रहा है... लेकिन चूंकि इन संगठनों की करतूतों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है, इसलिए कर्नाटक में इनके विस्तार को लेकर चौकसी बरतना राज्य सरकार और पुलिस की भी जिम्मेदारी है... यह बेवजह नहीं है कि प्रवीण नेत्तारू की हत्या के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों और संगठनों के बीच अपने ही पक्ष के नेताओं के खिलाफ आक्रोश देखा गया और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं... यों कर्नाटक में भाजपा के किसी नेता की यह पहली घटना नहीं है...
दृष्टिकोण
पाकिस्तान की फितरत...
तमिलनाडु में शतरंज ओलंपियाड में शामिल होने को लेकर पाकिस्तान ने जिस तरह की हरकत की है, उससे हैरान होने की जरूरत इसलिए नहीं है कि उसे ऐसा करने के लिए किसी तर्क की जरूरत महसूस नहीं होती है... चूंकि पाकिस्तान को अपने ऐसे ही दुराग्रहों से भरी प्रतिक्रियाएं देने की आदत रही है, इसलिए कभी वह अपनी फितरत के मुताबिक तो कई बार बहुत सोच-समझ कर ऐसा रुख अख्तियार कर लेता है, जिसमें सामान्य नैतिकताओं का ख्याल रखना भी जरूरी नहीं समझा जाता... दरअसल, तमिलनाडु के मामल्लापुरम में गुरुवार को शुरू हुए चौवालीसवें ओलंपियाड में इस बार ओपन वर्ग में एक सौ अठासी टीमें और महिला वर्ग में एक सौ बासठ टीमें हिस्सा ले रही हैं... इसमें पाकिस्तान की टीम भी शामिल थी और इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने भारत आ भी चुकी थी... लेकिन आखिरी वक्त में पाकिस्तान ने इस ओलंपियाड से हटने की घोषणा कर दी... ऐसे फैसले के लिए उसकी ओर से कथित शिकायत यह पेश की गई कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का रिले मशाल कश्मीर से निकालने के बहाने भारत इस आयोजन का राजनीतिकरण कर रहा है... सवाल है कि भारत शतरंज ओलंपियाड के रिले मशाल को अपने संप्रभु क्षेत्र के किसी भी हिस्से से गुजरने का रास्ता बनाता है, तो इससे किसी भी अन्य देश को क्यों दिक्कत होनी चाहिए... मगर बीते कई दशकों के अनुभव के बाद पाकिस्तान के संदर्भ में अब यह प्रश्न बेमानी-सा लगने लगा है... पाकिस्तान चूंकि भारत के प्रति आमतौर पर हर समय एक खास तरह के दुराग्रह से भरा रहता है, इसलिए बेवजह के किसी बहाने भी कोई विवाद खड़ा करना उसके स्वभाव में घुल गया है...