भारतीय संस्कृति
   Date30-Jul-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
'बे टी, तुमने अब तक का जीवन विधर्मी के संरक्षण में बिताया है। तुम्हें हमारे धर्म का तनिक भी ज्ञान नहीं है, इसलिए अब तुम्हें तुरन्त कुरान शरीफ की शिक्षा दी जाएगी।Ó मुगल सम्राट औरंगजेब ने अपनी 16 वर्षीय पौत्री सफीतुन्निसा से कहा, जो अब तक दुर्गादास राठौड़ के संरक्षण में पली थी, जहां छोड़कर उसका पिता अकबर अपने पिता औरंगजेब के डर से ईरान भाग गया था, किन्तु शाहजादी चिहुंक उठी- 'यह आप क्या कह रहे हैं अब्बा जान! चाचा दुर्गादास ने केवल बेटी की तरह मेरा पालन-पोषण ही नहीं किया है, बल्कि मुझे कुरान का पाठ पढ़ाने के लिए एक मुस्लिम स्त्री को भी नियुक्त कर दिया था। मुझे सारी कुरान कण्ठस्थ है। विश्वास न हो तो पूछ लीजिये। औरंगजेब विस्फारित नेत्रों से अपनी पौत्री की ओर देखता रह गया। उसके मुख से अनायास निकल पड़ा- 'तुम फरिश्ता हो दुर्गादास! खुदा के सबसे प्यारे बेटे हो, तुमने हमारी बेटी को हमारे धर्म की तालीम देकर मुझे मुरीद (प्रशंसक) बना लिया है। दुर्गादास ने विनम्रतापूर्वक कहा- 'यह मेरी प्रशंसा नहीं है दिल्लीश्वर, यह उस महान् धर्म और संस्कृति की प्रशंसा है, जिसने हमारे रक्त में मानवता का ऐसा प्रवाह उत्पन्न किया। आप उसी का सम्मान कीजिए।