बेहतर भविष्य की अनिवार्यता संवेदना और संस्कार
   Date30-Jul-2022

dharmdhara
धर्मधारा
ब च्चे क्यों गलत रास्ते पर चल रहे हैं? इसके कई कारण हैं। अधिकतर मामले घर के बिगड़े हुए माहौल की तरफ संकेत करते हैं। संयुक्त परिवार टूट चुके हैं। कई बार मां-पिता का अपना व्यवहार सही नहीं होता, इसलिए बच्चे भी वही सोच ग्रहण करते हैं। कई बार अभिभावक जरूरत से अधिक नरम और उदार बन जाते हैं। बच्चों को खुश रखने के लिए वह समझौते करते चले जाते हैं, जो आगे चलकर महंगे साबित होते हैं। कई परिवारों में बच्चों से संवाद टूट रहा है। दिल्ली के एम्स के डॉ. राजेश सागर सही शिकायत करते हैं कि पहले परिवारों में पूरा अनुशासन रहता था, लेकिन अब माता-पिता उनकी मांगों को पूरा कर देते हैं, क्योंकि उनके पास खुद बच्चों के लिए समय नहीं है। बच्चों को खुश रखना अब मजबूरी है। कई अभिभावक यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि वे अपने बच्चे के मित्र हैं। यह बड़ी भूल है। उन्हें बच्चों के आगे वह मिसाल कायम करनी चाहिए, जो उन्हें सही रास्ते पर रखे। आज के बच्चों के सामने एक बड़ा खतरा है-सोशल मीडिया। इतने यौन-अपराध भी इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से बच्चों को वह जानकारी खुलेतौर पर मिल रही है, जो पहले वर्जित समझी जाती थी, क्योंकि अभिभावकों के पास समय कम है और युवाओं के पास आई पैड या मोबाइल उपलब्ध हैं, इसलिए वे सोशल मीडिया पर अधिक-से-अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। आज सब फोन पर उपलब्ध है, इस पर नियंत्रण करने की तत्काल जरूरत है। अब तो वेब सीरीज शुरू हो गई है, जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं, कोई सेंसर नहीं। समय आ गया है कि एक समाज के तौर पर हम - अपने बच्चों की सुरक्षा के मामले को प्राथमिकता से लें। दिल्ली में 8 साल के बच्चे ने डांट के बाद अपना गुस्सा एक साल के बच्चे को पत्थर से मारकर उतारा। परिवार -परिवार के तौर पर इकट्ठे नहीं बैठते।
एक छात्रा ने बताया कि जब वह घर पहुँचती है तो माँ रिमोट से चिपकी रहती हैं। बच्चों को वह प्यार, देख-भाल तथा मार्गदर्शन आज नहीं मिल पाता, जो पहले मिलता था। संस्कारों के पतन की बड़ी कीमत सब चुका रहे हैं और इसीलिए सब गलत दिशा
की तरफ बढ़ते नजर आते हैं। क्क॥एक कवि ने लिखा है कि हमने भी छीना है, उनका बचपन। उनके हाथों में टीवी-मोबाइल थमाया किसने? बच्चों के ऊपर मत डालिए कछ। यह कसर कर कौन रह है? यह मैं कर रहा हूँ। कवि की बात सही है। हमने ही उनसे बचपन छीन लिया और उन्हें समय से पहले वयस्क बना दिया कई बार इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।