भ्रष्टाचार का भयावह दीमक...
   Date29-Jul-2022

vishesh lekh
किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए अपारदर्शी कृत्य जिसमें अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार को एक ऐसे दीमक के रूप में देखा जाता है, जो अंदर ही अंदर उस समाज और राष्ट्र की नसों को खोखला करने का कारण बन जाता है... क्योंकि जब आय से अधिक संपत्ति या अथाह धन एकत्रित करके कोई व्यक्ति या जिम्मेदार पद पर बैठा माननीय पूरे तंत्र को पंगु बनाने का दोषी हो तब इस लाइलाज नासूर का समय रहते उपचार जरूरी है... पश्चिम बंगाल में शारदा चिटफंड घोटाला किसी से छिपा नहीं है... यह तृणमूल कांग्रेस नेत्री ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल में ही एक ऐसी जमीन तैयार कर चुका था, जिसने पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार की सड़ांध को इस तरह फैलाया कि चिटफंड के जरिये लाखों करोड़ रुपए गरीबों और आम जनता के तृणमूल नेता-मंत्री चट कर गए थे... अब तीसरी पारी में ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को शिक्षक घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जिस तरह से हिरासत में लेकर जो अकूत नकदी संपत्ति का खजाना उजागर किया है, उसके लिए मशीने भी हांप रही है... सोना किलो से निकल रहा है, करीब आधे अरब से अधिक का यह घोटाला फिलहाल तो प्राथमिक स्तर पर है... पार्थ और अर्पिता के ऐसे कितने ही सहयोगी होंगे, जिन्होंने दिखावे के लिए चादर तो फटी और मैली-कुचेली ओढ़ रखी है, लेकिन उनके जर्जर मकानों में किस तरह से 2000 और 500 के नोटों का खजाना करोड़ों में छुपा है... इस पर अभी भी जांच व्यापक होना बाकी है... अगर इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो ममता सरकार के लगभग सभी मंत्री इसकी जद में आना तय है... क्योंकि इतना बड़ा घोटाला करने के बाद नकदी रुपयों का ऐसा भंडार इकट्ठा करना किसी एक मंत्री के बूते की बात नहीं है... जरूर इसमें सरकार से जुड़े अंगों, प्रशासनिक तंत्र, यहां तक कि ममता के करीबियों की भी मिलीभगत हो तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए... क्योंकि जिस तरह की खुल्लमखुल्ला लूट पश्चिम बंगाल में मची हुई है, यह संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाने के समान है... क्योंकि किसी मंत्री के घर से करोड़ों रुपए निकलते हैं और सरकार उसे लंबे समय तक मंत्री बनाए रखने के लिए मूकदर्शक बनी रहती है... यहां तक कि नकदी व सोना बरामदी के साथ गिरफ्तार पार्थ चटर्जी बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल का रुख कर लेते हैं... लेकिन जांच में कोई बीमारी सामने नहीं आती... कुल मिलाकर ऐसे भ्रष्ट नेताओं ने सार्वजनिक संपत्ति और आम जनता के टैक्स से अर्जित इस राष्ट्रीय धन को अपनी खुल्लमखुल्ला लूट का जरिया बना रखा है... आज नेता मारता नहीं है, बल्कि आम जनता को बुरी तरह से तल रहा है... उसके हकों पर, अधिकारों पर अवैध तरीके से डाका डालकर या फिर भ्रष्टाचार के दीमक के द्वारा पूरी व्यवस्था को चट कर जाने वाली यह पार्थ चटर्जी जैसी मानसिकता व कार्यशैली पर कड़ी नकेल जरूरी है...
दृष्टिकोण
अधीर का अशोभनीय व्यवहार...
संसद में सड़क की भांति हंगामा करने की कांग्रेसी मानसिकता ने अब तक 23 से अधिक सांसदों को सदन से निलंबित करवाने में भूमिका निभाई है... क्योंकि जब संसद में गंभीर मुद्दों पर भी बहस, चर्चा व तर्क-वितर्क के बजाय हंगामा ही विपक्ष का लक्ष्य हो जाए, तब स्थिति बिगाड़ की तरफ संकेत करती है... आखिर विपक्ष के नाते कांग्रेस व तमाम राजनीतिक दल यही तो कर रहे हैं, जिन्हें आम जनता की सबसे बड़ी दुखती रग महंगाई पर चर्चा की चिंता नहीं है, जो आम एवं सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा के बजाय ऐसे बयानों से संसद के अमूल्य समय की बर्बादी कर रहे हैं और कार्यवाही में बाधक भी बन रहे हैं... कांग्रेस की तरफ से विपक्ष के नेता के रूप में अधीर रंजन चौधरी का व्यवहार संसद की गरिमा के खिलाफ ही बार-बार सामने आता है और उसे वे संसद से बाहर सड़क पर भी दोहराते नजर आते हैं... आखिर निलंबित सांसदों के साथ प्रदर्शन के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने देश के सर्वोच्च पद एवं प्रथम व्यक्ति महामहिम राष्ट्रपति के लिए जिस तरह के अशोभनीय शब्दों का उपयोग किया, उनका उल्लेख करना यहां उचित नहीं है... लेकिन जब किसी पार्टी के प्लेटफार्म से इस तरह की बात करने के बाद भी अधीर रंजन जैसे व्यक्ति किसी तरह की धैर्यशील छवि का परिचय नहीं देते, तब इसका सीधा संकेत है कि वे राष्ट्रघाती कृत्यों की अधीरता को भी पार कर रहे हैं... आखिर राष्ट्रपति के संबंध में इस तरह की भाषाशैली राष्ट्र का ही अपमान है और सोनिया गांधी का अधीर रंजन के समर्थन में उतरकर बचाव करना न केवल कांग्रेस की मिट्टी पलीत करवा रहा है, बल्कि इस घृणित बयानबाजी से कांग्रेस और विपक्ष की मानसिकता का भी परिचय मिल रहा है...