श्रम का महत्व
   Date29-Jul-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
ए क दिन मुद्रणालय की बिजली अचानक बंद हो गई। ऐसे मौकों पर प्रथम पुष्ठ पर सूचना निकाल देने से कि 'आज बिजली चली जाने से अखबार देर में निकला हैÓ काम चल जाता है। पं. दीनदयालजी ने ऐसे समय भी जोर आजमाइश की। बिजली चली जाने पर हाथ पर हाथ धर कर बैठे नहीं रहे वरन् जल्दी-जल्दी मुद्रणालय पहुंचे। रात क्या सोने के लिए ही है? देखा कि दीनदयालजी छापेखाने की मशीन अपने हाथों से ढकेलकर चलाते जा रहे हैं- गति कम भले ही हो पर अखबार की छपाई बन्द नहीं हुई। बोलने की, उपदेश देने की आवश्यकता नहीं- स्वयं अपने आचरण में उन्होंने मानो एक मौन शिक्षा दी कि मशीनमैन का काम किसी प्रकार मैनेजिंग डायरेक्टर से हेय या कम महत्व का नहीं है। यों इस देश में आए दिन नारे लगते रहते हैं, श्रम ही देवता है, पर शिक्षित क्षेत्रों में वह देवता दिखाई नहीं देता।