प्रदर्शन से बेनकाब होती कांग्रेस...
   Date27-Jul-2022

vishesh lekh
नेशनल हेराल्ड मामले में जांच का सामना कर रही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को अगर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) किसी भी तरह की अनियमितता के मामले में अगर जांच के संदर्भ में पूछताछ के लिए बुला रही है तो इसमें इतना हड़कंप मचाने या फिर आक्रोश जताने, विरोध-प्रदर्शन के साथ ही अराजक व्यवहार करने की जरूरत क्या है..? क्या ईडी पहली बार किसी से पूछताछ कर रही है... या फिर सीबीआई ने क्या इसके पहले किसी के खिलाफ छापामार कार्रवाई या वृहद स्तर की जांच नहीं की है..? तब सवाल यह उठता है कि आखिर जांच एजेंसियों को सरकार का जांच कार्रवाई एजेंडा लागू करने वाली टीम कांग्रेस और विपक्ष किस हैसियत से और किन तथ्यों के आधार पर बता रहा है..? क्या इन जांच एजेंसियों ने और पुलिस टीम ने पहले भी अन्य राजनेताओं, पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसा है..? कांग्रेस के समय में किस तरह से जांच एजेंसियां लोगों को प्रताडि़त करती थी, अगर वह कार्रवाई उस समय सही थी, तो अब कैसे गलत हो सकती है..? सवाल इससे भी बड़ा यह है कि आखिर सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए ईडी बुलाती है तो इसके विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर अराजक व्यवहार क्यों करने लगते हैं..? क्या यह चोरी और सीनाजोरी मामले को उजागर नहीं करता है..? आखिर कांग्रेस के कार्यकर्ता इंदौर में ईडी कार्यालय की नेम प्लेट पर कालिख पोतने के साथ उस पर भाजपा लिखने के लिए किसकी सह पर पहुंच गए..? और अगर ऐसे बर्बर-अराजक और गैर कानूनी कृत्य करने पर कांग्रेस कार्यकर्ता को पुलिस ने अच्छे से सबक सिखाया है तो इसमें बुराई क्या है..? ईडी की इस पूछताछ प्रक्रिया में एक तरह से कांग्रेस सड़क पर उतरकर पूरे मामले को परिवर्तित करने की राजनीतिक स्वार्थ की मंशा से हिंसक प्रदर्शन कर रही है... इसके कारण रहवासी क्षेत्रों में न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि घंटों जाम लगने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं... आखिर सोनिया-राहुल नेशनल हेराल्ड मामले में कथित धनशोधन के आरोपी नहीं है या उन्होंने ऐसा कोई गबन नहीं किया है तो उन्हें डरने की जरूरत क्या है..? जांच प्रक्रिया का सामना करे, जो सच है, उसे सामने रखे... और दूध का दूध, पानी का पानी होने का इंतजार करे, लेकिन जांच प्रक्रिया को निर्बाध रूप से संपन्न करवाने के बजाय कांग्रेस पूछताछ के मामले में रोडे अटाकर जनता का ध्यान बांटना चाहती है... जनता से जुड़े ऐसे बहुत से मुद्दे है, जिस पर कांग्रेस सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन उसके लिए कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से एक परिवार की प्रतिष्ठा ही राष्ट्र की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है, जो कि जनता को भी रास नहीं आ रहा है... कांग्रेस ईडी मामले में जितना विरोध प्रदर्शन करेगी, वह उतनी ही बेनकाब होती चली जाएगी...
दृष्टिकोण
मंकीपॉक्स की बढ़ती दहशत...
वैश्विक महामारी कोरोना से पूरी दुनिया करीब दो-ढाई वर्षों से जूझते हुए जैसे-तैसे बाहर निकलने का प्रयास ही कर रही है, लेकिन इस बीच वैश्विक महामारी के रूप में पैर पसारता 'मंकीपॉक्सÓ पूरी दुनिया में दहशत का माहौल निर्मित कर रहा है... क्योंकि अभी तक 75 से अधिक देशों में 16 हजार से अधिक मामले मंकीपॉक्स के सामने आ चुके हैं और आधा दर्जन से अधिक लोगों की इस बीमारी के चलते मौत भी हो चुकी है... ऐसे में सतर्कता तो जरूरी है, क्योंकि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच मंकीपॉक्स की बढ़ती दहशत कोढ़ में खाज का कारण बन रही है और इसके दुष्परिणाम भयावह हो सकते हैं, तभी तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैश्विक आपात स्थिति करार देते हुए इस असाधारण संक्रामक स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने और हर तरह के सावधानी उपायों को अमल में लाने की बात कही है... क्योंकि यह रोग संक्रमित जानवर से मनुष्य में और मनुष्य से मनुष्य में भी फैलता है... मंकीपाक्स संक्रमण संक्रमित जानवर के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से मनुष्यों में फैलता है... मनुष्य से मनुष्य में इस संक्रमण का वाहक त्वचा और सांस छोड़ते समय नाक या मुंह से निकलने वाली थूक व लार की छोटी बूंदे भी कारक होती है... इस विषाणु की वजह से स्मालपाक्स अर्थात् छोटी चेचक होती है... जिसके कारण मनुष्य में बुखार, सिरदर्द या अन्य तरह के लक्षण सामने आने लगते हैं... फिलहाल इसके लक्षणों के आधार पर उपचार किया जा रहा है, इसका अधिकृत कोई टीका या दवाई नहीं है... इसलिए जरूरी है कि कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच जो दहशत मंकीपाक्स ने फैलाई है, उसको भी नियंत्रित करने के लिए हम सतर्कता बरतें...