मुर्मू का महामहिम सफर...
   Date26-Jul-2022

vishesh lekh
राजनीतिक रूप से जुड़े किसी महत्वपूर्ण मुद्दे या विषय पर कम से कम पक्ष-विपक्ष का देखने, सोचने और समझने का नजरिया बहुत भिन्न होता है और जब बात किसी संवैधानिक पद पर किसी को बैठाने या फिर सर्वोच्च पद अर्थात् राष्ट्रपति पद पर किसी को आरूढ़ करने की हो तो स्वाभाविक रूप से पक्ष-विपक्ष के बीच एक ऐसी महीन लक्ष्मण रेखा होती है, जिसका संकेत व संदेश स्पष्ट रूप से दोनों दलों को पता होता है... राष्ट्रपति के रूप में देश की दूसरी एवं पहली आदिवासी महिला नेत्री के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने शपथ के साथ अपनी 'महामहिमÓ की यात्रा शुरू कर दी है... इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस बार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर प्रत्याशियों पर नेता व दलों की ही नहीं, जनता की भी विशेष निगाहें व जिज्ञासा रही है... क्योंकि भाजपानीत राजग में जिस चौंकाने वाले अंदाज में विपक्षी एकता को भंग करते हुए अपने प्रत्याशियों को विपक्ष के लिए भी सर्वमान्य बना दिया, वह अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक चाल माना जा सकता है... अब उपराष्ट्रपति पद के लिए राजग-संप्रग के घोषित प्रत्याशियों ने राजग के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ पर हर किसी की निगाहें है, उन्हें एक जाट नेता के रूप में देखा जाता है और उनका उपराष्ट्रपति भवन पहुंचना भी एक नए समीकरणों को जन्म देने का कारण बनेगा... इसके चलते राज्यपाल मलिक या फिर किसान नेता राकेश टिकैत और किसानों के साथ जाटों की राजनीति करने वाले नेता-दलों को भी एक बड़ा संदेश जाने वाला है... राष्ट्रपति भवन में आदिवासी नेत्री के रूप में पहुंचने वाली द्रौपदी मुर्मू पहली महिला है और ऐसा कहा जाता है कि भाजपा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस सपने को पूरा किया है, जिसमें बापू चाहते थे कि कोई दलित महिला आजाद भारत की पहली राष्ट्रपति बने... विचार कीजिए आजादी के 75वें वर्ष में ही सही, लेकिन गांधीजी के सपने से एक कदम आगे बढ़कर देश के सबसे वंचित और गरीब वनवासी समाज को मुख्यधारा से जोडऩे में भाजपानीत राजग ने ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है... तभी तो सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ लेने के साथ द्रौपदी मुर्मू ने 'सभी को जोहारÓ अर्थात् उन्होंने अपना भाषण जोहार (आदिवासी इलाकों में जोहार का मतलब नमस्कार होता है...) कहकर शुरू किया... उन्होंने अपने पहले संबोधन में जो बातें रखी है उनका स्पष्ट संदेश यही है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को मानने और उसके परिपालन में प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे... क्योंकि उन्होंने भी माना है कि यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है कि उनके ऐसी गरीब आदिवासी महिला नेत्री को सर्वोच्च पद पर आसीन करवाने में इस लोकतंत्र की महती भूमिका है... उन्होंने गरीब और महिला वर्ग को विश्वास दिलाया है कि वे भारतीय आशाओं और अधिकारों की प्रतीक है... कुल मिलाकर द्रौपदी मुर्मू ने संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए लोकतांत्रिक प्रगाढ़ता को नया आयाम देने का संदेश दिया है...
दृष्टिकोण
रजत विजय का आत्मविश्वास...
टोक्यो और रियो ओलंपिक भारत के लिए खेल प्रतिभाओं को तरासने और नया उत्साह देने के मान से महत्वपूर्ण रहे हैं... क्योंकि टोक्यो और रियो के बाद ही भारत सरकार ने खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए 'खेलो इंडियाÓ कार्यक्रम शुरू किया था, जिसके सकारात्मक नतीजे अब प्रत्येक खेल क्षेत्र में आने लगे है... इसमें कोई दो राय नहीं कि टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चौपड़ा ने अपने उस जोश-जुनून और उत्साह को निरंतर परिष्कृत किया, उसी का परिणाम है कि आज विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में करीब 19 साल बाद भारत रजत पदक प्राप्त करने वाला देश बन गया है... यह ऐतिहासिक सफलता ही मानी जा सकती है... यूजीन में नीरज चौपड़ा ने अपनी भाला फेंक प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में जो छह अटेम्प्ट किए, उनमें से तीन फाउल करार दिए गए... नीरज ने पांचवे अटेम्प्ट में 88.13 मीटर का थ्रो किया जिसने उन्हें सिल्वर दिलाया... इसके अलावा उन्होंने 82.39 मीटर और 86.37 मीटर के थ्रो किए... यह भारतीय खेल क्षेत्र एवं खेल के क्षेत्र में उभरती, निखरती प्रतिभाओं के लिए बड़ी उत्साहजनक सफलता है कि नीरज वल्र्ड एथलेटक्सि चैंपियनशिप में भारत के लिए मेडल जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी और पहले पुरुष बन गए... इससे पहले अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में महिलाओं की लंबी कूद प्रतियोगिता में भारत को ब्रोन्ज मेडल दिलाया था... नीरज ने रजत पदक के साथ भविष्य की संभावना और खेल प्रतिभाओं को निरंतर प्रयास करते हुए लक्ष्य की तरफ आगे बढऩे का एक बेहतर संदेश दिया है...