परीक्षा परिणाम की प्रेरणा...
   Date25-Jul-2022

vishesh lekh
कुछ इंतजार के बाद शुक्रवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पहले 12वीं और फिर 10वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए... महामारी के कम से कम तीन चरम दौर के बाद आए ये नतीजे बहुत आशा जगाते हैं... बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कामयाबी मिली है और इससे अन्य निचली कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी बेहतर पढ़ाई व तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी... कक्षा 12वीं उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी 92.71 प्रतिशत, जबकि 10वीं पास करने वाले 94.40 प्रतिशत हैं... यह अच्छा है कि इस बार भी टॉपर घोषित नहीं किए गए हैं... टॉपर की सूची से समग्रता में लाभ कम और नुकसान ज्यादा होता है... किसी एक परीक्षा में नाकाम रहने वाले या कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों की मन:स्थिति का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए और यह काम सीबीएसई अच्छी तरह से करने लगा है... कोई भी परीक्षा परिणाम अंतिम नहीं होता... एकाधिक परीक्षाओं में नाकाम हुए विद्यार्थी भी आगे चलकर कामयाब हस्तियों में शुमार हुए हैं... कोई भी परीक्षा परिणाम एक प्रेरणा या पड़ाव है, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों का प्रदर्शन अच्छा हो सके... कमियों से सीखा जा सके... कई बार 10वीं में कम अंक लाने वाले 12वीं में बहुत अंक लाते हैं और कई 12वीं में कम अंक लाने वाले कॉलेज में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन कर गुजरते हैं... महामारी से प्रभावित पढ़ाई के बावजूद सीबीएसई कक्षा 10 में 64,908 या 3.10 प्रतिशत विद्यार्थियों को 95 प्रतिशत या उससे ज्यादा अंक मिले हैं। कुल 2,36,993 या 11.32 प्रतिशत विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक मिलना भी बहुत उत्साहजनक है... खास बात यह है कि दक्षिण भारत के विद्यार्थी और खासकर त्रिवेंद्रम क्षेत्र के विद्यार्थियों का प्रदर्शन 10वीं और 12वीं, दोनों में बहुत शानदार रहा है... 10वीं में दिल्ली क्षेत्र के परिणाम निराश करते हैं, इस क्षेत्र में सफलता प्रतिशत 87 भी नहीं है, जबकि 96 प्रतिशत से ज्यादा के साथ नोएडा, 94 प्रतिशत से ज्यादा परिणाम के साथ प्रयागराज क्षेत्र की कामयाबी प्रशंसनीय है... राष्ट्रीय राजधानी में परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए हरसंभव प्रयास करने पड़ेंगे... बच्चों को केवल सुविधा दे देने से अच्छे परिणाम नहीं मिलेंगे... पूर्वोत्तर क्षेत्र पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है... अब परंपरा-सी हो गई है, लड़कियों का उत्तीर्णता प्रतिशत हमेशा ही ज्यादा रह रहा है... लड़कियां जिस हठ और विशिष्टता के साथ स्कूल पास कर रही हैं, उसी उत्साह के साथ उन्हें उच्च शिक्षा में भी झंडे गाडऩे चाहिए... परीक्षा परिणामों का अध्ययन करते हुए यह देखना भी जरूरी है कि किन स्कूलों के विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं... क्या बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का ही विस्तार नहीं करना चाहिए..? क्या बेहतर पढ़ाने वाले स्कूलों के ढांचे या खासियत का व्यापक प्रचार नहीं करना चाहिए..?
दृष्टिकोण
आर्थिक कमजोरी के संकेत...
भारतीय उद्योग संगठन फिक्की ने चालू वित्त वर्ष की विकास दर के अनुमान को घटा कर सात फीसदी कर दिया है... उसने यह भी कहा है कि अगर कोई अन्य व्यवधान आया तो यह दर साढ़े छह फीसदी भी रह सकती है... हालांकि अप्रैल में फिक्की ने इस वर्ष विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था... रिजर्व बैंक ने विकास दर के 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था... फिक्की का ताजा अनुमान उससे कम है... रेटिंग एजेंसी मार्गन स्टेनली ने भी अपनी अनुमान दर को 7.6 से घटा कर 7.2 कर दिया था... यानी अप्रैल के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था की गति सुधरी नहीं है... नई अनुमान दरों के पीछे कुछ कारण स्पष्ट हैं, जिनमें बढ़ती महंगाई, रुपए की गिरती कीमत, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बदली वैश्विक स्थितियां, निर्यात में कमी, उपभोक्ता मांगों का घटना आदि प्रमुख हैं... सरकार दावा करते नहीं थकती कि कोरोना काल के बाद से अर्थव्यवस्था में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है और जल्दी ही यह अपनी पुरानी लय में लौट आएगी... मगर जिस तरह उद्योग जगत में निराशा दिखाई दे रही है, उससे स्वाभाविक ही सरकार के दावे प्रश्नांकित होते हैं... हालांकि सरकार ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कई कड़े कदम उठाए, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की, बैंक दरों में बदलाव किए गए, मगर महंगाई काबू में नहीं आ पा रही... ऊपर से सरकारी खर्चों में कटौती नहीं की जा रही, राजस्व घाटा पाटने के लिए नई-नई वस्तुओं पर कर थोपे जा रहे हैं... कर उगाही को सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती के रूप में देखती है... मगर बाजार इसलिए सुस्त पड़ा है कि उसमें उपभोक्ता की उत्साहजनक पहुंच नहीं हो पा रही...