दायित्व-बोध
   Date25-Jul-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
रा जा जनक की शोभायात्रा के लिए मिथिला नगरी के राजपथ को पथिक विहीन करने की प्रक्रिया में जब राज सेवकों ने अष्टावक्र महामुनि को हटने के लिए कहा, तो उन्होंने हटने से इंकार कर दिया और कहा, प्रजा के आवश्यक काम रोककर सुविधा का प्रबंध करना राजा के लिए अनुचित है। मैं हटूंगा नहीं। राजपथ पर ही चलूंगा। राजसेवकों ने नाराज होकर महामुनि को बन्दी बना लिया और राजा जनक के सामने पेश किया। सारी बात सुनकर राजा जनक बहुत प्रभावित हुए और बोले, जिस देश में राजा तक को सजा दे सकने वाले सत्पुरुष हों, वह देश धन्य है। ऐसे लोगों को दंड नहीं सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने महामुनि से क्षमा मांगी और कहा, आपने हमें गलती का अहसास कराया। आज से आप हमारे राजगुरु होंगे और इसी तरह हमें अन्याय से बचाने की कृपा करते रहेंगे।