बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के आगे बेबस शेख हसीना
   Date25-Jul-2022

sd1
डॉ. बचन सिंह सिकरवार
हा ल में पड़ोसी बांग्लादेश में एक हिन्दू द्वारा तथाकथित विवादित पोस्ट किए जाने के बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के कई घरों और दुकानों में लूटपाट के बाद उन्हें आग के हवाल करने साथ मन्दिर में तोडफ़ोड़ की जो वारदात हुई है, वह तो इनके लिए बस एक बहाना है। इस मुल्क में कब और कहाँ किस बहाने ये कट्टरपंथी हिन्दुओं पर हमला कर उनकी जान ले लें, कुछ कह पाना ठीक नहीं है। इसकी वजह यहां बढ़ती मजहबी कट्टरता और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में पुलिस-प्रशासन की कौताही बरतना है। इससे इन जिहादियों के हौंसले बुलन्द हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि प्रधानमंत्री शेख हसीन वाजेद भारत से मैत्री की बात तो करती हैं,पर हिन्दुओं पर कट्टरपंथियों के हमलों पर खामोश बनी रहती हैं, ताकि उनकी हुकूमत कायम रहे। इस सुबूत यह है कि पिछले साल यहां दुर्गा पूजा समारोह के समय कुछ हिन्दू मन्दिरों में अज्ञात मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा तोडफ़ोड़ और आगजनी की गई थी। उस दौरान हुए दंगों में चार लोग मारे गए और कई लोग जख्मी हुए थे। तब सरकार को 22 जिलों में अद्र्धसैनिक बलों को तैनाती करनी पड़ी थी। कानूनी अधिकार समूह ऐन-ओ सलीश केन्द्र की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी, 2013 से सितम्बर, 2021 के दौरान यानी नौ वर्ष में हिन्दुओं पर 3,679 हमले किए गए हैं। इसी 15 जुलाई, शुक्रवार को नारेल जिला के सहपारा गांव की है। यहां नमाज के बाद हिन्दू युवक की पोस्ट पर तनाव बढ़ा। मुसलमानों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों के बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। फिर उन पर हमला कर दिया। शाम साढ़े सात बजे राधा गोविन्द मन्दिर पर ईंटें फेंकी और उसके फर्नीचर को नष्ट कर दिया। इसके अध्यक्ष 65 वर्षीय शिवनाथ साहा का कहना था कि पुलिस पहरा दे रही है,लेकिन हम उन विश्वास नहीं कर सकते। पीडि़त दीपाली रानी ने बताया कि मुसलमानों के गुट ने उनके घर का सारा कीमती सामान लूट लिया। दूसरे गुट ने घर खाली देखकर उसमें आग लगा दी।
गत वर्ष बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ और बंगबन्धु शेख मुजीबुर्रहमान की जन्मशती पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 27 मार्च, 2021 को स्वदेश वापसी के एक दिन बाद यहां इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू मन्दिरों समेत पूर्वी बांग्लादेश में एक ट्रेन पर जिस प्रकार हमले किए गए, उससे स्पष्ट है कि इस हमसाया मुल्क में भारत और हिन्दुओं के दुश्मनों की कमी नहीं है। यहां हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में दस कट्टरपंथी मारे गए हैं और करीब दो दर्जन लोग घायल भी हुए हैं। बांग्लादेश की इन वारदातों को देख कर भारत के लोगों को हैरानी-परेशानी जरूर हुई होगी, क्योंकि ज्यादातर लोगों को बांग्लादेश की जमीनी हालात का पता जो नहीं है। इस मुल्क के संस्थापक और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान खुद मजहब के आधार पर भारत का विभाजन तथा पाकिस्तान के गठन की मांग करने वाली 'मुस्लिम लीगÓ के नेता रहे थे। बाद में पाकिस्तान ने हममजहबी बंगाली मुसलमानों के साथ जिस तरह से भेदभाव और उनका उत्पीडऩ किया, उसने उनका नजरिया ही बदल दिया। इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा की खामियां उनकी समझ में अच्छी तरह आ गईं। बाद में उनसे नाखुश कुछ फौजियों ने 15 अगस्त, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान की परिवार समेत हत्या कर दी। अब शेख मुजीबुर्रहमान की राह पर उनकी बेटी तथा प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद भी चलने की कोशिश कर रही हैं, जो इस्लामिक कट्टरपंथियों की आंखों में बराबर खटक रही हैं। इन कट्टपंथियों को अपने मुल्क में सेकुलरिज्म कतई मंजूर नहीं है। अब यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ढाका हवाई अड्डे पर पहुंचने पर यह कहना आवश्यक समझा कि हमें याद रखना चाहिए कि वाणिज्य और व्यापार के क्षेत्र में हमारे पास समान अवसर हैं, लेकिन हमारे सामने भारत और बांग्लादेश को आतंकवाद जैसे खतरों और ऐसे अमानवीय कृत्यों के पीछे की मानसिकता तथा ताकतें अब भी सक्रिय हैं। उनसे सर्तक और एकजुट रहना चाहिए। उस समय ढाका में प्रधानमंत्री मोदी ने शेख मुजीबुर्रहमान को मरणोपरान्त 'गांधी शान्ति पुरस्कार,Ó2020 उनकी बेटी शेख हसीन, शेख रिहाना को प्रदान किया। इसके अलावा ढाका और न्यूजलपाईगुड़ी के मध्य एक नई यात्री रेल का भी उद्घाटन भी किया। भारत और बांग्लादेश ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में पांच सहमति पत्रों यथा-आपदा प्रबन्धन, खेल एवं युवा मामलों, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों (एमओयू)पर हस्ताक्षर किए गए। इसके सिवाय स्वास्थ्य, व्यापार,सम्पर्क, ऊर्जा, विकास के क्षेत्र में सहयोग और कई अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति पर विचार-विमर्श किया गया। उनकी तीस्ता नदी के जल बंटवारे के बारे में वार्ता भी हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश को 109 एम्बुलेंस तथा 12 लाख कोरोना वैक्सीन भी भेंट कीं। वर्तमान में भारत का बांग्लादेश के साथ सैन्य सहयोग भी निरन्तर बढ़ रहा है। अफसोस की बात यह है कि फिर भी इस मुल्क के कुछ अहसानफरामोश इस्लामिक कट्टरपन्थी भारत और हिन्दुओं की मुखालफत से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजुब्ब की बात यह है कि जिस पाकिस्तान के सेना ने उनके मुल्क के लाखों लोगों का कत्ल-ए-आम करने के साथ ढाई से तीन लाख महिलाओं से बलात्कार किया है, उनके प्रति इन्हें गिल-शिकवा तो दूर, उल्टी मुहब्बत है। इसकी वजह यह है कि वह हममजहबी मुल्क जो है। इनका उसूल है कि अपने ने मारा तो कोई बात नहीं, गैर ने मारा तो खैर नहीं। अब चर्चा करते है कि बांग्लादेश के बनने की। क्या इन इस्लामिक कट्टरपंथियों को पता नहीं,यह मुल्क हिन्दुओं का भी है,जिन्होंने उनसे कहीं ज्यादा कुर्बानियां दीं। भारत के सहयोग और सैन्य सहायता से ही पाकिस्तान के साथ 13 दिन युद्ध के बाद 16 दिसम्बर, सन् 1971 में विश्व मानचित्र पर बांग्लादेश का उदय हुआ था। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में कोई 3900 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। तब पाकिस्तान की सेना के 93,565 सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। मुक्ति संग्राम से पहले पाकिस्तानी सेना के दमन के कारण तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान(वर्तमान में बांग्लादेश) से कोई एक करोड़ बंगाली मुसलमान और हिन्दू भारत में शरण लेने को विवश हुए थे। तब कई महीनों तक उनका रहने-खाने का भारत ने खर्चा उठाया था। भारत की सैन्य सहायता के बगैर यह सब असम्भव था।
उस समय भी बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों का एक समूह पाकिस्तानी सैनिकों का मददगार बनकर अपने देशवासियों पर ही हर तरह के जुल्म ढहाने, उनके कत्ल करने और महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहा था। हालांकि प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद इनमें से कुछ को अदालत के जरिये उन्हें 'युद्ध अपराधीÓ ठहराते हुए फांसी पर लटकवा चुकी हैं,पर उन जैसी जिहादी सोच का अभी पूरी तरह खात्मा नहीं हुआ है, ऐसे लोग भारत और हिन्दुओं को इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं।
बांग्लादेश तीन ओर से भारत से घिरा हुआ है, इसके दक्षिण-पूर्व में म्यांमार है। इसकी भूमि सीमाएं भारत तथा म्यांमार से मिलती हैं। इसका क्षेत्रफल 1,48,393 वर्ग किलोमीटर है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका तथा मुद्रा- टका है। इस देश की जनसंख्या- 15,03,19,000 से अधिक है। यहां के लोग बंगला, चकमा, माध भाषाएं बोलते हैं। ये इस्लाम, हिन्दू, बौद्ध, ईसाई धर्म के अनुयायी हैं। यह देश स्वाधीन होने के बाद से आन्तरिक अशान्ति से ग्रस्त रहा है। जनवरी, 2007 में देश में आपात काल लगाया गया और चुनावी हिंसा रुक गई। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अहमद ने 22 जनवरी,2007 के चुनावों को स्थगित कर दिया। फखरुद्दीन अहमद ने अन्तरिम प्रशासन का दायित्व लिया। 6 इस्लामिक उग्रवादियों को बमबारी के आरोप में फांसी पर लटका दिया गया। अप्रैल,2007 में शेख हसीना वाजेद पर हत्या का आरोप लगा। बेगम खालिदा जिया को नजरबन्द कर दिया गया। भ्रष्टाचार के आरोप में कई राजनीतिज्ञों की गिरफ्तारी हुई। हिंसा के बीच आम चुनाव हुए और शेख हसीना की पार्टी की जीत हुई। तब एक बार फिर शेख हसीना प्रधानमंत्री बनीं। इस मुल्क की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। धान सबसे मुख्य खाद्यान्न फसल है। यह विश्व में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जिसमें 80 प्रतिशत जूट पैदा होता है। प्रमुख औद्योगिक उत्पादन- वस्त्र, चीनी, जूट, चाय, काली मिर्च, उर्वरक, प्राकृतिक गैस, इस्पात, बिजली, सिलेसिलाए कपड़े, तम्बाकू,रबर, रसायन, मशीनें आदि हैं।
अब देखना यह है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद इन इस्लामिक कट्टरपंथियों से निपटने और अल्पसंख्यक हिन्दू, बौद्ध, ईसाइयों को सुरक्षा प्रदान करने में कहां तक सफल हो पाती है? उन्हें यह भी याद रखना होगा कि इस्लामिक कट्टरपंथियों का दमन किए बगैर उनके मुल्क का विकास सम्भव नहीं है।
(लेखक स्तंभकार हैं)