जय जगन्नाथ...पुरी में श्रद्धालुओं का सैलाब
   Date02-Jul-2022

jagernath (1)
पुरी द्य चार धामों में से एक विश्व प्रसिद्ध पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में वार्षिक रथयात्रा के मौके पर शुक्रवार को देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचे और भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथयात्रा में शामिल हुए। 12वीं शताब्दी के इस ऐतिहासिक मंदिर के सामने 'बड़ा डंडाÓ (ग्रैंड रोड) के रूप में जाने जाने वाले तीन किलोमीटर लंबे सड़क पर तिल धरने को भी जगह नजर नहीं आई। मंदिर के सेवकों ने जैसे ही भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को बाहर निकाला , समूचा माहौल 'जय जगन्नाथÓ, 'हरिबोलÓ के उद्घोष से गूंज उठा।
इससे पहले सुबह भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के लिए सेवकों द्वारा अनुष्ठानों की रस्म पूरी की गई, जिसमें देवताओं को बाहर निकालने से पहले आवश्यक अनुष्ठानों के बाद गोपाल भोग (नाश्ता) देना शामिल था। कड़ी सुरक्षा के बीच आनंद बाजार और बैशी पहाचा (मंदिर की बाईस सीढिय़ां) से होते हुए शंख फूंकने के बीच सैकड़ों मंदिर सेवकों ने मंदिर से देवताओं को अपने कंधों पर उठा लिया। भगवान जगन्नाथ के 16 पहियों वाले लाल और पीले रंग के नंदीघोष, 14 पहियों वाले बलभद्र के लाल और हरे रंग के तालध्वज और देवी सुभद्रा के लाल और काले रंग के देवदलन के रथों में 12 पहिये हैं।
अनुष्ठानों के तहत भगवान बलभद्र को पहले रत्न वेदी से बाहर निकाला गया और औपचारिक पहंडी बिजे के माध्यम से तलध्वज नामक रथ में स्थापित किया गया, उसके बाद देवी सुभद्रा को दार्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ को प्यार से बुलाया गया। लाखों भक्तों द्वारा कालिया को नंदीघोष रथ में स्थापित किया गया। कोविड महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से रथयात्रा महोत्सव देखने से वंचित रहे लाखों श्रद्धालु जैसे ही मंदिर से देवी-देवताओं को बाहर आते देख हरिबोल और जय जगन्नाथ के नारे लगाने लगे।
माना जाता है कि सार्वजनिक रूप से देवताओं की उपस्थिति अंधेरे को दूर करने और प्रकाश लाने के लिए माना जाता है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की एक झलक पाने के लिए लायंस गेट पर भक्तों की व्यापक भीड़ थी।