तालिबानी दरिंदगी...
   Date30-Jun-2022

vishesh lekh
मजहबी कट्टरता का यह घृणित खेल आखिर वहां पहुंच ही गया, जिसका लंबे समय से हर किसी को डर सता रहा था... आखिर किसी व्यक्ति ने किसी धर्म विशेष के संबंध में क्या टीका-टिप्पणी की है... उसका समर्थन और विरोध एक स्वाभाविक क्रिया-प्रतिक्रिया है, लेकिन जब कट्टरपंथी धर्मांधता का नंगा नाच इस तरह की दरिंदगी पर उतर आए कि इस्लामिक स्टेट के दुर्दांत आतंकवादी भी अपने पिशाची कृत्यों को इस तरह की दरिंदगी के आगे कमतर मान बैठे या फिर सीरिया और तालिबान में जिस तरह से तथाकथित इस्लामिक लड़ाकों ने लोगों को गोलियों से छलनी किया और इससे भी बढ़कर जिस तरह से कट्टरपंथी इस्लामिक धड़ों ने जम्मू-कश्मीर में नरसंहार को रह-रहकर दोहराया... उन सब हैवानियतभरे पाशिवक कृत्यों की पराकाष्ठा को पार करते हुए राजस्थान के उदयपुर में जो कुछ हुआ है, जिस तरह से कन्हैयालाल का सिर धड़ से अलग किया गया, वह इस हलाल मानसिकता का घृणित परिचय है, जिसका आधार ही कट्टरपंथी और नरपिशाची हिंसा को लगातार बढ़ावा देना है... आखिर 10 दिन पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने वाले कन्हैयालाल का धोखे से वह भी कपड़े के नाप देने के बहाने जबरिया दुकान में घुसना और निहत्थे अकेले व्यक्ति पर दो दरिंदों का तलवार व हथियार लेकर टूट पडऩा, यह बताता है कि विश्व के कोने-कोने से जिस तरह से इस्लामिक आक्रांताओं ने झूठ-फरेब के द्वारा कत्लेआम किया था, उसी घृणित कृत्य को अब पुन: दोहराने का यह षड्यंत्र शुरू हो चुका है... क्योंकि जिन दरिंदों रियाज अंसारी और मोहम्मद गौस ने कन्हैयालाल पर हमला करके गला काटा, वे आदतन रूप से हिंसा और राष्ट्रघाती कृत्यों में शामिल है... लेकिन इससे भी बढ़कर इस घृणित खेल में विदेशी साजिश की बू सूंघने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत को यह ध्यान रखना चाहिए कि पाकिस्तान इस कृत्य में शामिल है या नहीं, लेकिन जिन दो स्थानीय मुस्लिमों ने इस हैवानियत वाली दरिंदगी को अंजाम दिया है, क्या उनके लिए कांग्रेस शासन फांसी की मांग करेगा..? क्योंकि राजस्थान तो लंबे समय से ऐसे ही मुस्लिम तुष्टिकरण की आग पर धधक रहा है... आएदिन राजस्थान में ऐसे हिंसक कृत्य आम बात है... हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करना और बहुसंख्यक हिन्दुओं के क्षेत्र में साजिशसन रूप से हिंसा को बढ़ावा देना मानो कांग्रेस के राज में एक परिपाटी बन गई है... ऐसे में अगर यह बार-बार आशंका जताई जा रही थी कि यह तालिबानी दौर भारत में स्थानीय मुस्लिमों के द्वारा हिंसक कृत्यों से किया जा रहा है तो इस पर सख्ती जरूरी है, साथ ही कड़ी प्रतिक्रिया को झेलने के लिए क्या गेहलोत सरकार तैयार हैं..?
दृष्टिकोण
स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक प्रयास...
इलमाऊ में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा के साथ ही नई तकनीक को सहज-सरल और सस्ता बनाने की पहल हुई है... अगर कहें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के प्लेटफार्म से भारत की स्वच्छ ऊर्जा एवं तकनीकी नवाचार के प्रयासों को नया आयाम देते हुए भविष्य की उन्मीद जगाई है तो अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए... क्योंकि भारत में इस एक दशक में तकनीक व ऊर्जा संबंधी नवीन प्रयोगों द्वारा इस बात को बड़ी ही प्रमाणिकता के साथ विश्व के समक्ष रखा है कि जलवायु, ऊर्जा और स्वास्थ्य पर संपूर्ण विश्व को संयुक्त रूप से प्रयास करते हुए न केवल नैसर्गिक प्राकृतिक संपदा को बचाने का प्रयास करना है, बल्कि इसमें उत्तरोत्तर वृद्धि के प्रयास भी करना होंगे... क्योंकि भारत ने जलवायु समस्या से निपटने के लिए संकल्प के साथ कदम बढ़ाए हैं, तभी तो भारत ने समय से पहले नौ साल के भीतर गैर जीवाश्म ोतों से 40 फीसदी ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है... हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा, सतत जीवनशैली और वैश्विक कल्याण के लिए भारत के प्रयासों को आज विश्व आशाभरी निगाहों से देख रहा है... जी-7 के प्लेटफार्म से भारत का यह प्रयास उल्लेखनीय रूप से रेखांकित हुआ कि भारत ने पेट्रोल में 10 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पांच माह पूर्व हासिल कर लिया... यही नहीं, दुनिया का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा भी भारत ने शुरू कर दिया है... कार्बन उत्सर्जन एवं बढ़ते तापमान के बीच किस तरह से स्वच्छ ऊर्जा की प्राथमिकता को नया आयाम दिया जा सकता है, इस दिशा में भारत ने बहुत ही व्यापक स्तर पर करके दिखाया है... यह अपने आप में यह बड़ी बात नहीं है कि 64 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश पांच साल में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आया है... ऊर्जा की पहुंच पर केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं हो, गरीबी देशों को भी इसका हक मिले, इस दिशा में भारत ने विश्व मंच से इस बात को बड़े साहस के साथ उठाया है...