याचक कौन?
   Date30-Jun-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
न गर का नामी अमीर हजरत इब्राहिम के पास मिलने के लिए पहुंचा। मन में अपनी अमीरी का अहंकार था तो वह साथ में उपहार के रूप में बेशुमार हीरे-जवाहरात और अशर्फियों की थैलियां भी ले गया था। उन सबको वह हजरत के पैरों में डालकर उनसे उनके आशीर्वाद की याचना करने लगा। प्रत्युत्तर में हजरत बोले- 'यह सब हटा लें। मैं भिखारियों की लाई सौगात नहीं लेता।Ó हजरत इब्राहिम के इस वचन ने अमीर के अहंकार को चोट पहुंचाई। वह बोला- 'हजूर! आपको शायद गलतफहमी हुई है। मैं भिखारी नहीं, बल्कि शहर का सबसे अमीर आदमी हूं।Ó हजरत इब्राहिम बोले- 'तू यदि अमीर है तो आशीर्वाद की याचना लेकर क्यों खड़ा है?Ó वह अमीर बोला- 'आपका आशीर्वाद मिल जाए तो मैं देश का सबसे अमीर व्यापारी बन जाऊं।Ó हजरत इब्राहिम ने कहा- 'जब तेरी हसरतों का ही ठिकाना नहीं है तो अपने को भिखारियों से जुदा क्यों मानता है? जब तक मन में कामनाएं हैं, तब तक व्यक्ति याचक ही रहता है।