लक्ष्य के लिए प्रत्येक कदम सीढ़ी की तरह
   Date30-Jun-2022

dharmdhara
धर्मधारा
ए क जंगल में दो पक्षी रहते थे। उस जंगल के एक 'छोर पर एक वृक्ष था, जिसमें वर्ष में एक बार स्वादिष्ट फल लगते थे। जब फलों का मौसम आया, तो जंगल के उन दोनों पक्षियों ने वहां जाने की योजना बनाई। इस संदर्भ में पहले पक्षी ने दूसरे पक्षी से कहा- 'वह वृक्ष यहां से बहुत दूर है, इसलिए मैं तो आराम से वहां पहुंचूंगा। अभी फलों का मौसम दो माह रहेगा।Ó इस बात पर दूसरे पक्षी ने अतिउत्साहित होकर कहा-'नहीं मित्र! मुझसे तो रहा नहीं जा रहा है। उन स्वादिष्ट फलों के बारे में सोचकर ही मेरे मुंह से पानी आ रहा है, इसलिए मैं तो एक ही उड़ान में वहां पहुंचकर मीठे फल खा लेना चाहता हूं।Ó इसलिए दूसरे दिन दोनों पक्षी अपने घोंसलों से निकलकर उस वृक्ष की ओर उड़ चले। कुछ दूर जाने पर पहले पक्षी को थकान होने लगी, तो वह विश्राम करने के लिए एक वृक्ष की टहनी पर ठहर गया। वहीं, दूसरा पक्षी उसे ठहरा हुआ देखकर मुस्कराया और तेजी से फलों की ओर उडऩे लगा। हालांकि वह भी थकान का अनुभव करने लगा था, पर उसे तो फल खाने की जल्दी थी, इसलिए वह बिना रुके ही उड़ता गया। अब उसे दूर से ही फलों वाला वृक्ष दिखाई देने लगा। फलों की सुगंध भी उसे आने लगी, लेकिन तभी उसके पंख लडख़ड़ाए, क्योंकि वह बुरी तरह थक चुका था। वह आसमान से जमीन पर जा गिरा। उसके पंख बिखर गए और वह उन फलों तक कभी नहीं पहुंच सका। 'दूसरी ओर, पहला पक्षी जो रुक-रुककर आ रहा था, वह फलों तक आराम से पहुंच गया। फिर उसने जी भरकर स्वादिष्ट फल खाए।Ó इससे यह सीख मिलती है कि एक-एक कदम चलकर ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जितना महत्व प्रयास व श्रम का है, उतना ही महत्व विश्राम का भी है। विश्राम करने से हमें मार्ग की थकान से राहत मिलती है और आगे बढऩे के लिए ऊर्जा भी मिलती है। अति उत्साह और लालच का परिणाम नुकसानदायक व हानिकारक हो सकता है। इसलिए मंजिल तक पहुंचने के लिए उत्साह तो बनाए रखना चाहिए, लेकिन अति उत्साह में अपना नियंत्रण नहीं खोना चाहिए।