स्टार्टअप का बढ़ता दायरा...
   Date29-Jun-2022

vishesh lekh
आत्मनिर्भर भारत अभियान एक नारा या फिर लोकलुभावन संदेशभर नहीं है, बल्कि इस व्यापक नीति के केन्द्र में भारत सरकार की वह नीति और नीयत समाहित है, जो देश के कुशल कामगारों और संगठित श्रमिकों को भी एक ऐसा प्लेटफार्म देने की पहल कर रहा है, जिससे भारत की प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया आयाम निर्धारित होगा... रोजगार, निर्माण और उत्पादन की दृष्टि से स्टार्टअप नीति को भारत के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है... क्योंकि अब स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत ने अपने अलग तरह की पहचान और साख का निर्माण कर लिया है... पहली बार भारत के पांच शहरों ने दुनिया के शीर्ष 100 की सूची में स्थान बनाया है... यह स्टार्टअप का बढ़ता वह दायरा है, जिसमें नवाचार व नए-नए प्रयोग के जरिए शिक्षित युवा पीढ़ी बड़े-बड़े उद्योगों व उद्यमियों के लिए भी मिसाल प्रस्तुत कर रही है... स्टार्टअप ईकोसिस्टम की सूची को देखें तो बेंगलुरु जहां आठवें स्थान पर है, वहीं दिल्ली ने 13वां पायदान पाया है... इसके अलावा चैन्नई, पुणे और हैदराबाद भी स्टार्टअप नीति के अनुकूल एक नई पहल के साथ आगे बढ़ रहा है... इजरायल के स्टार्टअप-ब्लिंक संगठन की ओर से जो सालाना रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है, उसमें दावा किया गया है कि आने वाले समय में भारत स्टार्टअप के क्षेत्र में नया इतिहास गढ़ेगा... अगर वैश्विक रैंक की दृष्टि से देखें तो भारत के बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, चैन्नई शहर को शिक्षा तकनीक में क्रमश: 8वां, 17वां, 97वां, 102वां पायदान मिला है, पुणे को यातायात में 90वां और जयपुर को ई-कॉमर्स रिटेल में 212वीं वैश्विक रैंक मिली है... स्टार्टअप की इस वैश्विक पहल में शामिल होने के लिए भारत सरकार ने व्यापक स्तर पर प्रयास किए... जिनमें तीन प्रमुख प्रयासों में स्व प्रमाणन की व्यवस्था लागू करना, स्टार्टअप इंडिया हब का निर्माण करना एवं कम दर पर तेजी से पेटेंट परीक्षण की व्यवस्था ने स्टार्टअप के इस नवाचार कार्यक्रम को तेजी से बढ़ावा दिया है... सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, होटल, बैंकिंग क्षेत्रों में कई प्रकार के स्टार्टअप ने आकार लिया, जिसमें न केवल शिक्षित युवाओं ने उत्सुकता दिखाई, बल्कि सकारात्मक परिणाम की भी एक नई विधा को जन्म दिया है... शिक्षा तकनीक के द्वारा हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और चैन्नई में व्यापक रूप से काम हुआ है... क्योंकि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर निर्माण का इस स्टार्टअप नीति के कारण लाभ मिला... यहां शिक्षा तकनीक से संबंधित स्टार्टअप को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया... अगर स्टार्टअप नीति की इस गुणवत्ता संख्या और कारोबारी माहौल पर ध्यान दिया जाए तो यह स्टार्टअप नीति बहुत ही सकारात्मक दिशा में क्रांतिकारी बदलाव का निमित्त बन रही है...
दृष्टिकोण
उपचुनाव नतीजों के मायने...
लोकतंत्र में चुनाव को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है.., क्योंकि कभी लोकसभा के तो कभी विधानसभा के, फिर राज्यसभा के और आएदिन लोकसभा-विधानसभा के उपचुनाव के दुदुंभि बजती रहती है... वैसे तो उपचुनाव के नतीजे हमेशा से यह माना जाता है कि वह सत्तासीन सरकार फिर चाहे वह केन्द्र में हो या फिर राज्य में हो... परिणाम उनके अनुकूल ही आते हैं, लेकिन जब उपचुनाव सत्तापक्ष के विपरीत जाते हैं तो उसके अनेक संकेत निकाले जाते हैं, लेकिन अब उपचुनाव में भी समीकरण बदलने लगे हैं... यह बात गत दिनों लोकसभा की तीन सीटों और विभिन्न राज्यों की दर्जनभर विधानसभा सीटों के नतीजों से सिद्ध होती है... सर्वाधिक चर्चा उत्तरप्रदेश के रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आए चुनावी नतीजों को लेकर है... क्योंकि उत्तरप्रदेश में गत वर्ष ही विधानसभा के चुनाव में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने वापसी की है... ऐसे में इन दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे रामपुर व आजमगढ़ में जो कि समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाते हैं, मुलायम से लेकर अखिलेश तक जहां आजमगढ़ से चुनकर आते रहे हैं, वहीं रामपुर में आजम खान का दबदबा रहा है... लेकिन इस बार इन दोनों ही सीट भाजपा ने अपने खाते में डाली है... ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद आजमगढ़ में सपा जीतती रही, लेकिन इस बार सपा को मुंह की खाना पड़ी... यह दोनों ही सीटों की जीत भाजपा के लिए 2024 के चुनाव में मजबूत जनमत आधार का संकेत है... क्योंकि संगरूर में आआपा ने भी सत्तासीन होने के बाद यह लोकसभा सीट शिअद के आगे गंवा दी है... ऐसे में यह माना जा सकता है कि आने वाले समय में लोकसभा चुनाव 2024 के मान से ये नतीजे बहुत कुछ कहते हैं...