अनासक्त जीवन
   Date29-Jun-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
कि सी व्यक्ति ने शेख फरीद से पूछा- 'महापुरुष असंख्य कष्ट मिलने पर भी मुस्कराते कैसे रहते हैं?Ó फरीद मुस्कराए और उस व्यक्ति को एक गीला नारियल तोडऩे को दिया। व्यक्ति ने उसे तोड़ा तो उसका खोपरा साबुत न होकर टुकड़ों में था और नारियल का छिलका उससे चिपका हुआ था। फिर शेख फरीद ने उस व्यक्ति को एक सूखा नारियल तोडऩे को दिया। जब उस व्यक्ति ने उस नारियल को फोड़ा तो उसमें से नारियल की गिरी वाला गोला साबुत निकला और नारियल का खोल भी पूर्णतया अलग हो गया। फरीद ने प्रश्नकर्ता से कहा- 'यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं और सामान्य व्यक्ति गीले नारियल की तरह। सामान्य व्यक्ति अपने शरीर, परिवार, संपत्ति आदि से चिपके हुए होते हैं। इसलिए कष्ट आने पर बहुत दु:खी होते हैं, परंतु महापुरुष सूखे नारियल की तरह मोह-माया से परे होते हैं। कष्ट आने पर वे उससे स्वयं को ऐसे ही पृथक महसूस करते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल अलग होता है। उनका जुड़ाव केवल बाहरी होता है, भीतरी नहीं।Ó