यह तो जीत की शुरुआत है...
   Date28-Jun-2022

vishesh lekh
रियो ओलंपिक में जिस तरह से भारतीय खिलाडिय़ों के विविधतापूर्ण खेल प्रदर्शनों में पदक की झड़ी लगी थी, उसके बाद केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने खेल की विविधतापूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा देने और खेल संस्कृति में नवाचार के साथ प्राचीन खेलों और उन सभी खेल विधाओं को नया आयाम देने की पहल की थी, ताकि स्थानीय स्तर पर खेले जाने वाले खेल के साथ ही उन सुदूर-ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को भी नया आयाम और बेहतर अवसर मिले, जो एक बड़े मेट्रो शहर के खिलाड़ी से किसी भी स्थिति में कमतर नहीं हैं... इसके लिए मोदी सरकार ने 'खेलो इंडिया खेलोÓ योजना लागू की... खेल संस्कृति को बढ़ाने वाली यह पहल न केवल जिला स्तर पर, बल्कि ब्लॉक स्तर तक की खेल प्रतिभाओं को नया अवसर देने में सफल हुई है... मध्यप्रदेश ने बेंगलुरु में इतिहास रचते हुए 41 बार रणजी ट्रॉफी में विजेता रहे मुंबई को 6 विकेट से हराकर वह कीर्तिमान रच दिखाया, जिसका लंबे समय से मध्यप्रदेश के खेल जगत को ही नहीं, उन खेल प्रशंसकों, खिलाडिय़ों को भी इंतजार था, जिन्होंने दिन-रात इस खेल गतिविधि को आगे बढ़ाने में कहीं न कहीं आहुति दी थी... मध्यप्रदेश की ग्रामीण खेल प्रतिभाएं जिन्होंने रणजी ट्रॉफी में अपनी कुशल खेल दक्षता का प्रमाण दिया है... शुभम शर्मा ने 116 रन, यश दुबे 134, रजत पाटीदार ने 122 रन बनाकर जो शतक जमाए, उसी का नतीजा है कि 6 विकेट से मध्यप्रदेश टीम को रणजी की यह ट्रॉफी जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ... इस पूरे खेल प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान कप्तान के तौर पर मध्यप्रदेश को रणजी ट्रॉफी जिताने में विफल रहने वाले चंद्रकांत ने बतौर कोच के रूप में मध्यप्रदेश को रणजी ट्रॉफी के द्वारा सिरमौर बना दिया... यह उनका वह सपना था, जो स्वयं ट्रॉफी हाथों में लेकर मध्यप्रदेश का नाम रोशन करना चाहते थे, लेकिन अब उनके शिष्यों ने अपनी खेल प्रतिभा के द्वारा मध्यप्रदेश के साथ कोच का भी मान बढ़ाने का काम किया है... अगर कहें कि मध्यप्रदेश की क्रिकेट क्षेत्र में यह खेल गतिविधि नया आयाम का संकेत है, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए... क्योंकि 'खेलो इंडिया खेलोÓ एवं रणजी ट्रॉफी में बेहतरतीन प्रदर्शन के बाद मध्यप्रदेश की औद्योगिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक राजधानी इंदौर की खेल गतिविधियां विशेष रूप से क्रिकेट को एक नया आयाम मिलने वाला है... क्योंकि रणजी ट्रॉफी के बाद यहां के खिलाडिय़ों की खेल प्रतिभा और उत्साह को पंख लगना निश्चित है... तभी तो मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी रणजी ट्रॉफी 2022 में प्रदेश के खिलाडिय़ों की अद्भुत प्रदर्शन कला एवं अद्वितीय खेल प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए गद्गद् मन से भावविभोर होकर उनको बधाई दी है... रणजी ट्रॉफी सोमवार शाम को जब इंदौर पहुंची तो भव्य स्वागत ने इस बात की अभिव्यक्ति कर दी कि खेल के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने नई संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए यह तो बस जीत की शुरुआतभर है...
दृष्टिकोण
दंगों पर अब माफी क्यों नहीं..?
गुजरात के गोधरा में जिस तरह से कारसेवकों को साबरमती एक्सप्रेस की बोगी में जिंदा जलाया गया था, उसकी आक्रोश प्रतिक्रिया का ही नतीजा गुजरात के दंगे थे... लेकिन भारतीय लोकतंत्र की विडंबना देखिए कि राजनीतिक स्वार्थ का चश्मा जान गंवाने वालों को भी अलग-अलग नजरिये से देखने की उस रतौंधी का प्रमाण है, जिसमें करीब दो दशक अर्थात् 19-20 साल से गुजरात के दंगों में मारे गए लोगों के जीवन का हिसाब-किताब लेने के लिए तो बार-बार राजनीतिक बयान, जांच आयोग यहां तक कि कोर्ट में लगातार याचिकाएं लगाई जाती रही... तब के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी को न केवल दंगों का दोषी ठहराने के घृणित आरोप लगाए गए, बल्कि विदेशी षड्यंत्रकर्ताओं द्वारा दंगों के जबरिया दाग लगाकर मोदी की छवि को धूमिल करने का कोई अवसर नहीं गंवाया... यहां तक कि एक लॉबी ने तो अमेरिका से वीजा तक रद्द करवाने का खेल खेला... लेकिन जिन लोगों के गुजरात दंगों में मुस्लिमों की मौत पर आंसू टपक रहे थे, उन्होंने कभी भी दंगों में मारे गए हिन्दुओं के प्रति संवेदना प्रकट करने का साहस नहीं जुटाया... फिर वे साबरमती एक्सप्रेस में साजिशपूर्वक अनजाम दिए गए गोधरा कांड को कैसे स्वीकार करते..? किस तरह से उसमें जिंदा जलाए गए श्रीराम भक्तों के प्रति संवेदना का भाव प्रकट करते..? इसलिए देश का सर्वोच्च न्याय मंदिर अगर यह कहता है कि गुजरात के दंगे साजिश नहीं थी, तो अब तक जो लोग नरेन्द्र मोदी को दंगों की साजिश का किरदार बताते रहे और माफी मांगने की मांग करते रहे, क्या उन्हें दो दशकों से दंगों पर राजनीति करने के लिए देश से, नरेन्द्र मोदी से और भाजपा से माफी नहीं मांगना चाहिए...