प्रेम और एकता
   Date28-Jun-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
ए क सेठजी के चार बहुएं थीं। वे उग्र स्वभाव की थीं। सेठजी के घर में हर समय लड़ाई-झगड़ा तथा कलह-क्लेश होता रहता था। एक रात को सेठजी को स्वप्न में लक्ष्मीजी ने आकर कहा-'मैं तुम्हारे घर से अब जा रही हूं। कलह-क्लेश वाले स्थान पर रुक पाना मेरे लिए संभव नहीं है।Ó यह सुनकर सेठजी रोने लगे और उनसे न जाने की विनती करने लगे। लक्ष्मीजी द्रवित होकर बोलीं- 'क्लेशयुक्त वातावरण में रह पाना मेरे लिए संभव नहीं, पर तुम्हें एक वरदान दे सकती हैं। जो चाहो, वो मांग लो।Ó सेठजी बोले- 'आप मुझे यह वरदान दें कि मेरे घर में प्रेम व एकता हो जाए।Ó लक्ष्मीजी 'तथास्तुÓ कहकर अंतध्र्यान हो गईं और वहां से चली गईं। दूसरे ही दिन से सेठजी के घर में सभी प्रेम से रहने लगे और उनका कलह समाप्त हो गया। सेठजी ने पुन: स्वप्न देखा कि लक्ष्मीजी उनके घर फिर से रहने आ गई हैं और कह रही हैं- 'जहां प्रेम व एकता होती है, वहां मैं स्वत: आ जाती हूं।Ó