महर्षि की सीख
   Date27-Jun-2022

prernadeep
प्रेरणादीप
म हर्षि वशिष्ठ महाराज अज से मिलने जा रहे थे। मार्ग में एक व्यक्ति मिला। उसने अपना दु:ख प्रकट करते हुए कहा - 'ऋषिवर! मैंने सदैव सदाचरण किया है तो भी आज तक किसी ने न तो मेरी प्रशंसा की और न ही मुझसे प्यार किया।Ó महर्षि वशिष्ठ ने विचार किया और बोले - 'आज से सदाचरण के साथ-साथ प्रिय वाणी बोलने का भी अभ्यास करो तो तुम्हें सर्वत्र सम्मान मिलेगा।Ó उनके निर्देश का पालन करके वह व्यक्ति कुछ ही दिनों में सर्वत्र लोकप्रिय हो गया।