युवाओं में राष्ट्रीयता को प्रखर करेगा अग्निपथ...
   Date26-Jun-2022

parmar shakti
ब्रेकके बाद
शक्तिसिंह परमार
भा रतीय सैन्य इतिहास में 'अग्निपथ योजनाÓ एक नए स्वर्णिम अध्याय का श्रीगणेश करेगी... राष्ट्र की वह युवा शक्ति जो शिक्षित होकर, डिग्रीधारण करके भी रोजगार की तलाश में दर-दर भटकती है, उसे 'अग्निवीरÓ के रूप में एक निश्चित समयावधि तक रोजगार की गारंटी ही नहीं मिलने जा रही है, बल्कि इससे भी बढ़कर वह मां भारती की सेवा के स्वर्णिम अवसर प्राप्ति का साक्षी भी बनेगा, जो हर भारतीय युवा का सपना है या होना ही चाहिए... इस युवा तरुणाई के बल पर हमारे सश बलों के सामथ्र्य में अभिवर्धन हेतु देर से ही सही, लेकिन सटीक एवं अतिआवश्यक निर्णय के लिए तीनों सेनाएं एवं सरकार अभिनंदन की पात्र है... देश-दुनिया के निरंतर बदलते सैन्य लक्ष्य, तैयारी व चुनौती और संभावनाओं के मान से भारत में अग्निपथ एक ऐसा दूरदर्शी कदम है, जो तीनों सेना में युगांतरकारी परिवर्तन लाएगा... भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को संपूर्णता प्रदान करने वाला यह 'स्वदेशी सैन्य आत्मनिर्भरताÓ विस्तार अभियान वर्तमान एवं भविष्य की सामरिक समृद्धि की वचनबद्धता का भी द्योतक है... आज भारत में तीनों सेनाओं में 42,07,250 सैनिक है... जबकि देश में करीब 25 लाख पूर्व सैनिक है... प्रति वर्ष तीनों सेनाओं से करीब 70 हजार सेवानिवृत्त होते हैं... हमारे सैन्य खर्च का 75 फीसदी फिलहाल पेंशन पर खर्च होता है... इस वित्त वर्ष में कुल 5.22 लाख करोड़ के रक्षा बजट में से 1.19 लाख करोड़ तो पूर्व सैनिकों की पेंशन में चला गया... अत: यह अग्निवीर भर्ती अभियान रक्षा बजट के पेंशन संबंधी असंतुलन को आने वाले वर्षों में संतुलित करने का भी आधार बनेगा...
अग्निपथ में चार वर्ष की सेवा के बाद अग्निवीरों के लिए नौकरी की सुरक्षा संबंधी राज्यों एवं केन्द्रीय मंत्रालय के अनेक विभागों ने घोषणा की है... यही नहीं टाटा-महिंद्रा से लेकर बैंकों एवं अन्य उपक्रमों ने भी अग्निवीरों को नौकरी/अन्य सेवाओं में प्राथमिकता देने की बात कही है... उप्र, मप्र, उत्तराखंड, असम, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में राज्य पुलिस सेवा, सुरक्षा बल में भी अग्निवीरों को वरीयता का वचन दोहराया है... चार वर्ष की समयावधि के बाद एकमुश्त राशि से नए रोजगार का सृजन करने में अग्निवीर समर्थ होंगे... इन सब बातों से बढ़कर प्रमुख तथ्य यह भी है कि चार वर्ष में अग्निवीर सैन्य दायरे में राष्ट्र भक्ति, समय प्रबंधन, आत्मानुशासन एवं नियमों के प्रति प्रतिबद्धता का जो गुढ़ पाठ सीखेंगे, वह किसी अन्य संस्था या सेवाकाल में मिलना असंभव है... यानी अग्निवीरों को रोजगार के साथ नकद राशि एवं स्व-आत्मानुशासन का जो राष्ट्रीय भाव जाग्रत होगा, वह ऐसे बोनस के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसके द्वारा हम भावी पीढ़ी में सेना के प्रति लगाव, राष्ट्र सुरक्षा एवं संयम-अनुशासन के गुणों का स्थायी बीजारोपण करने में समर्थ होंगे...
अग्निपथ योजना एवं भविष्य के अग्निवीरों को लेकर निरर्थक विरोध का बवाल काटने वाले हिंसक उपद्रवियों से पूछा जाना चाहिए कि जिन्होंने विरोध के नाम पर 1200 करोड़ से अधिक की राष्ट्रीय संपत्तियों को खाक कर दिया, क्या वे सेना के दायरे तक जाने की भी योग्यता रखते हैं..? क्योंकि सेना की पहली शर्त ही राष्ट्रप्रेम और साहस है... देश को हिंसा की आग में झोंकना राष्ट्र निष्ठा का ज्वार तो कतई नहीं माना जा सकता और जो उपहास योजना का उड़ाया जा रहा है, वह किसी कायरता से कम नहीं है... क्योंकि विरोध का आधार ही अतार्किक और पूर्णत: दिशाभ्रम वाला है... आखिर देश के युवाओं को सेना में प्रवेश करवाकर उनका देश के प्रति राष्ट्रभाव बढ़ाने का फैसला गलत कैसे हो सकता है..? जबकि इस अग्निपथ से 'एक पंथ-दो काजÓ की भांति रोजगार का अवसर, राष्ट्र सेवा के भाव की जाग्रति यानी एक साथ दो असाध्य दुष्कर कार्य सरलता से संभव होंगे... फिर भूले नहीं कि भारत में फिलहाल अग्निपथ योजना पूर्णत: स्वैच्छिक है... किसी भी होनहार एवं साहसी युवा को भारत की मोदी सरकार या तीनों सेना प्रमुख जबरिया पकड़कर भर्ती नहीं करने वाले हैं... जैसा कि आपातकाल में जबरिया नसबंदी की... या नौकरी करने के साथ आपातकाल के समर्थन या मौन रहने की शर्त नत्थी की गई थी... अथवा अंग्रेजों के राज में जिस तरह से नौकरी के एवज में लोगों को एजेंट या मुखबिर के रूप में कार्य करना पड़ता था... इन सबसे परे अग्निपथ योजना युवाओं को सेवा के साथ राष्ट्र निष्ठा की गारंटी जैसा है... भूले नहीं कि विश्व के अनेक देशों में तो सैन्य सेवा अनिवार्य है... इजराइल, ब्राजील, ईरान, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, सिंगापुर, स्वीट्जरलैंड, थाईलैंड, रूस, तुर्की और यूएई में अनिवार्य सैन्य सेवा का कानून है... फिर भारत में अग्निपथ के लिए अनिवार्यता से छूट अर्थात् स्वैच्छिक सैन्य सेवा का भी जब ऐसा विरोध हो रहा है, तब विश्व के अनेक देश भारत में ऐसी विरोधी मानसिकता पर तरस ही खा रहे होंगे... क्योंकि इजराइल में पुरुषों के लिए ढाई तो महिलाओं के लिए दो वर्ष की सैन्य सेवा अनिवार्य है... रूस में 18 से 27 वर्ष की उम्र में एक वर्ष सैन्य सेवा जरूरी है, तो तुर्की में 20 से 41 वर्ष के सभी पुरुषों को सेना में जाना होता है... इरान में 16 साल की उम्र में 24 माह सैन्य सेवा देना होती है... यूएई में 16 माह की सैन्य सेवा अवधि निश्चित है... ऐसे में भारत में जब आजादी के बाद से ही ऐसी व्यवस्था को लागू करना था, उस भूल सुधार को आजादी के 'अमृत महोत्सवÓ की बेला में तीनों सेनाओं एवं मोदी सरकार ने जांच परखकर आगे बढ़ाया है तो इसका विरोध वह भी राष्ट्र को भयावह नुकसान पहुंचाकर करना यह बताता है कि देश की सैन्य भर्ती प्रक्रिया के पवित्र उद्देश्य से उन राष्ट्रघातियों के पेट में मरोड़ उठ रही है, जो सेना को सदैव बदनाम करने, उन्हें अछूत बताने और भारतीय युवाओं के मस्तिष्क से राष्ट्रभाव को रिक्त करने के लिए टुकड़े-टुकड़े गैंग की भांति आए दिन राष्ट्र के खिलाफ बोलना, कार्य ही अपना लक्ष्यधर्म बना चुके हैं... ध्यान रहे इसी घृणित मानसिकता को अग्निपथ के जरिये करारा जवाब मिलने वाला है...
अग्निपथ में समय के साथ जो-जो कमियां-खामियां होगी, उन्हें दूर किया जाएगा... तभी तो सरकार ने पहले भर्ती की उम्र सीमा 17.5 से 21 वर्ष रखी थी, लेकिन अब इसे 23 वर्ष किया गया है... कहने का तात्पर्य यह है कि किसी बिंदु का तार्किक विरोध ही उचित है... भारत में कब, किस बात के लिए विरोध शुरू हो जाए और वह भी हिंसक, अराजक यहां तक कि राष्ट्र की सुरक्षा, अस्मिता भी दांव पर लग जाए तो विरोधियों, प्रदर्शनकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता... यह हमने 2014 में दिल्ली में बदली सत्ता, उसकी नीतियों से कुपित हुए धड़ों की चरणबद्ध राष्ट्रघाती जुगाली के रूप में देखा है... भूमि अधिग्रहण कानून, तीन तलाक-हलाला की कुप्रथा से मुक्ति का विरोध, शत्रु संपत्ति कानून में सुधार का विरोध, नोटबदली-जीएसटी, सीएए, एनआरसी से लगाकर कृषि सुधार कानून हो या फिर अब ताजा-ताजा सिर्फ नौकरियों की सौगात के साथ राष्ट्र भाव का जज्बा जगाने वाली योजना 'अग्निपथÓ का हिंसक विरोध... भारत में बिना सोचे-समझे कुतर्क का पहाड़ खड़ा करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने की कुछ धड़ो से आदतन अपराधी शैली तेजी से फैली है... सवाल, अग्निपथ का विरोध आखिर क्यों..? क्या किसी को रोजगार देना, नौकरी का अवसर उपलब्ध कराने की नीति बनाना, आखिर किसी को नागवार कैसे गुजर सकता है..? इसका सीधा-सीधा जवाब और कारण यही है कि अग्निपथ का विरोध करने वाले, बस-ट्रेनों को फूंकने वाले ना तो सेना में जाने के इच्छुक थे और ना ही राष्ट्र सेवा का भाव उनमें कभी आएगा... वे उसी टुकड़े-टुकड़े गैंग और 'भारत तेरी बर्बादीÓ का नारा बुलंद करने वालों के दूषित विचारों से खाद-पानी पाकर दिशाभ्रमित हुए है/होते रहेंगे... इन सारी समस्याओं का समाधान भी अग्निपथ के जरिये अग्निवीरों में राष्ट्रभाव की जाग्रति से संभव हो इसलिए विरोध नहीं, समर्थन जरूरी है...