प्रथम पद के लिए नामांकन...
   Date25-Jun-2022

vishesh lekh
लोकतांत्रिक भारत में गणतांत्रिक व्यवस्था के सफल संचालन एवं संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण में देश के प्रथम व्यक्ति अर्थात राष्ट्रपति की अहम भूमिका है...भारत में राष्ट्रपति का चयन एक ऐसी प्रक्रिया है जिस पर देश की ही नहीं दुनिया की भी निगाह रहती है..,क्योंकि भारत में राष्ट्रपति कभी भी रबर स्टम्प नहीं माना जा सकता...प्रत्येक स्थिति में राष्ट्रपति की अपनी एक अलग और सशक्त भूमिका है...क्योंकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग राष्ट्रपति को माना गया है...देश के सोलहवें राष्ट्रपति के रूप में भाजपानीत राजग की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने आज प्रधानमंत्री के साथ ही भाजपा शासित एवं गठबंधन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थितियों में नामांकन दाखिल किया...यह प्रथम पद के लिए किसी गौरव से कम नहीं बात नहीं है कि नामांकन करते समय द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावक के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं मौजूद थे...ओडिशा के मयूरभंज जिले के आदिवासी बहुल्य इस कस्बे की रहने वाली द्रौपदी मुर्मू ने सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान की लंबी यात्रा तय की है...वे राष्ट्र के इस प्रथम पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला नेत्री का गौरव हासिल करने जा रही है...यह आदिवासियों की सम्मान को द्विगुणित करने जैसा है ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने तमाम विपक्षी दलों की मांग को ठुकराते हुए आदिवासी महिला नेत्री को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठाने के लिए समर्थन की खुली घोषणा की...यही नहीं आंध्रप्रदेश में सत्तारूढ़ वायएसआर कांग्रेस ने भी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान का संकेत किया है...यह तो मुर्मू के सहज-सरल व्यक्तित्व-कृतित्व का परिचय है कि उन्हें केंद्र सरकार से दूर रहने वाले विपक्षी दलों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है...और प्रथम पद के लिए प्रत्याशी चुने जाने के बावजूद द्रौपदी मुर्मू की सहजता उस समय हर किसी को भावविभोर कर गई जब उन्होंने अपनी जन्मभूमि स्थित शिव मंदिर में सुबह सूर्योदय से पहले झाड़ू लगाई...इसके बाद पूजा-अर्चना की...विचार किया जा सकता है कि झारखंड पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव हासिल कर चुकी द्रौपदी मुर्मू का मंदिर में साफ-सफाई करना नियमित दिनचर्या का हिस्सा ही है...वे 2021 में झारखंड के राज्यपाल पद से मुक्त होने के बाद यही क्रम अपने जीवन में बनाए हुए है...द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को अपना नामांकन राष्ट्र के प्रथम पद अर्थात राष्ट्रपति चुनाव के लिए दाखिल किया है...इसके पहले उन्होंने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सौजन्य भेंट की थी...तब प्रधानमंत्री ने उनके असाधारण सामाजिक दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए उन्हें राष्ट्र की जमीनी सच्चाई के अनुभूति वाली शख्सियत करार दिया...
दृष्टिकोण
ग्राम सरकार की तैयारी...
लोकतंत्र में नीति व निर्माण से संबंधित सभी तरह की प्रक्रिया का विकेन्द्रीकरण हेतु पंचायत राज को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जाता है..,जहां से विकास की वास्तविक पहुंच और जरूरतमंदों को शत-प्रतिशत लाभ प्रदान करने का दावा किया जा सकता है...क्योंकि ग्राम पंचायत अपने आप में उस ग्राम की सरकार ही है..,जो उसकी रोजमर्राई आवश्यकताओं के साथ ही भविष्य निर्माण संबंधी हर तरह के फैसले लेकर उस पर अमल के लिए जवाबदेह होती है...पंचायत राज व्यवस्था के कारण किस तरह से नीति-नीयत में बदलाव की एक व्यापक परिभाषा गढ़ी जा सकती है...इसका उदाहरण के रूप में हम ग्राम पंचायत राज कानून की उन व्यवस्थाओं को पर निगाह डाले तो पता चलता है कि ग्राम प्रमुख अर्थात् पंचायत का मुखिया किस तरह से गांव के सर्वांगीण विकास का निमित्त बन सकता है...मध्यप्रदेश में ग्राम सरकार अर्थात् पंचायत राज व्यवस्था के तहत त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में जिसमें ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है...पहले चरण का मतदान शनिवार को सुबह 7 से 3 बजे के बीच होगा...पंचायत चुनाव की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है...लोकसभा-विधानसभा से इतर पंचायत चुनाव बैलेट पेपर के आधार पर ही होंगे...पहले चरण में ग्वालियर, भिंड, सीहोर, इंदौर समेत प्रदेशभर के 52 जिलों में 115 जनपद, पंचायत की 8 हजार 702 ग्राम पंचायतों में मतदान होगा...27 हजार 49 पंचायत केंद्र पर करीब 1 करोड़ 49 लाख 23 हजार 165 मतदाता बैलेट पेपर के जरिये ग्राम सरकार का निर्णय करेंगे...ग्राम पंचायत के लिए मतदान प्रक्रिया की यह पहल तीन चरणों में होने वाली है...इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई है...क्योंकि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है...मतदान कर्मचारियों को मतदान सामग्री लेकर पहुंचने में भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा...कुछ भी हो यह जरूरी है क्योंकि ग्राम सरकार के आकार लेने का लंबे समय से इंतजार है...