सकारात्मकता का प्रारंभ है धैर्य
   Date23-Jun-2022

dharmdhara
धर्मधारा
प्र त्येक मनोरोग की शुरुआत तनाव से होती है, आप देखिये शीत और उष्ण, सुख और दु:ख हमारे जीवन की अनुकूलता छीन लेते हैं, हम नहीं सहन कर पाते हैं और हम विचलित हो जाते हैं। विभिन्न कारणों से मिलने वाली विकलता अंतत: हमें मनोरोगी तक बना सकती है। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार बुरा होता रहे या उसको कभी सफलता न मिली हो, तो उसका आत्मविश्वास छिन जाता है। ऐसी स्थिति में कोई भी शुभ चीज उसके जीवन में प्रवेश करती है तो वह उसे महसूस ही नहीं कर पाता, क्योंकि उसे शंकाएं घेर लेती हैं, वह घबराता है। आज जीवन में तितिक्षा का गुण व्यक्ति खोता जा रहा है, इसलिए यदि परिवार में पत्नी पति को कुछ कह दें, पति पत्नी को कुछ कह दें, मां-बाप बच्चे को कुछ कह दें तो थोड़ी ही देर में आत्महत्या करने तक की बातें हो जाती हैं। अक्सर अखबारों में निकलता है कि स्कूल में रिजल्ट निकलने के साथ कितने बच्चों ने आत्महत्या कर लीं। क्यों? क्योंकि लोग मानसिक घात-प्रतिघात सहन नहीं कर पाते। इसलिए मानसिक तितिक्षा सामान्य जीवन की भी आवश्यकता है।