सेना का स्पष्ट रुख...
   Date22-Jun-2022

vishesh lekh
नई सैन्य भर्ती योजना अग्निपथ को लेकर गिनती के लोग विरोध जता रहे हो और ऐसे दिशाभ्रमित युवा जिन्हें योजना की कोई जानकारी नहीं, वे तार्किक विरोध के बजाय सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर देश को गर्त में धकेलने का राष्ट्रघाती पाप कर रहे हैं... सप्ताहभर में ही इस योजना के विरोध के चलते हजार करोड़ से अधिक की राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान हुआ है और लाखों-करोड़ों के टिकट रद्द हुए, वो पलीता रेलवे को अलग से लगा है... इस सारे राष्ट्रीय अपराध के जिम्मेदार लोगों को किसी भी तरह का राष्ट्रीय सेवा का अवसर देना 'आ बैल मुझे मारÓ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को दांव पर लगाने जैसा है... इसलिए तीनों सेना के उच्च अधिकारियों ने रविवार को जिस तरह का स्पष्टीकरण प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा दिया है, वह उन लोगों के लिए तगड़ा झटका है, जिन्होंने बिना सोचे-समझे योजना के विरोध में तोडफ़ोड़, आगजनी और लंबा बवाल काटा है... तभी तो थल, वायु और नौसेना ने सख्त रुख दिखाते हुए कह दिया कि किसी भी स्थिति में अग्निपथ योजना वापस नहीं ली जाएगी... इससे भी बड़ी जो बात सैन्य अधिकारियों ने कही है, वह यही है कि अब अग्निपथ योजना के जरिए भर्ती योजना में शामिल होने वाले आवेदकों को साबित करना होगा कि वे इस योजना के विरोध में हिंसा व तोडफ़ोड़ में शामिल रहे थे... यानी अब तक जो लोग शामिल रहे हैं, उनका तो इस योजना से बाहर होना तय ही है, लेकिन अगर कोई दिशाभ्रम में आकर इसका विरोध करता है, तो उसे भी यह समझ लेना चाहिए कि भविष्य में वह किसी तरह के आवेदनकर्ता के रूप में अग्निपथ योजना के लिए पात्र नहीं होगा... यह सख्त संदेश उपद्रवियों, दंगाइयों और बलवाइयों को जरूरी था, क्योंकि उन्होंने जिस तरह से पूरे देश में सेना व सरकार के खिलाफ हिंसात्मक माहौल निर्मित करने का षड्यंत्र रचा, यह किसी अपराध से कम नहीं है... सेना का स्पष्ट रुख सामने आने के बाद इस बात को बल मिला है कि अब दिशाभ्रमित आंदोलनकारी राष्ट्रीय संपत्ति की नुकसान पहुंचाने से बाज आएंगे... क्योंकि थलसेना आने वाले समय में 40 हजार अग्निवीरों की भर्ती के लिए 83 भर्ती रैली आयोजित करने वाला है... जबकि वायुसेना 24 जून से अग्निवीरों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर देगा... वहीं नौसेना भी 25 जून तक भर्ती के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है... ऐसे में यह जरूरी है कि भर्ती प्रक्रिया से पूर्ण पूरे देश में शांतिपूर्ण माहौल स्थापित हो... जिन लोगों की हिंसा में संलिप्तता रही है, उनकी राज्यवार जांच रिपोर्ट बुलवाई जा रही है, उसी के आधार पर कड़ी कार्रवाई होना तय है और होना भी चाहिए...
दृष्टिकोण
राजनीतिक अस्थिरता का भंवर...
महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस की तिकड़ी ने महाराष्ट्र महाविकास अघाड़ी नाम से सरकार को मूर्तरूप दिया था... हालांकि महाराष्ट्र में शिवसेना की उद्धव ठाकरे सरकार अपने जन्मकाल से ही राजनीतिक अस्थिरता के भंवर में फंसी नजर आई है... कभी उसे शिवसेना के विधायकों ने ही आंख दिखाई तो कभी कांग्रेस-राकांपा भी अपने निहित स्वार्थ के लिए अलग-अलग दिशा में लगाम खींचते नजर आए... अब ताजा हालात जिस तरह के निर्मित हो रहे हैं, उसके बाद यह माना जा रहा है कि उद्धव सरकार कभी भी औंधे मुंह गिर सकती है... यानी उद्धव ठाकरे कभी भी पूर्व मुख्यमंत्री हो सकते हैं... क्योंकि जब उनके ही विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे पहले एमएलसी चुनाव में क्रास वोटिंग के द्वारा उद्धव सरकार को आईना दिखा चुके थे, लेकिन अब बकायदा दो दर्जन विधायकों के साथ महाराष्ट्र से बाहर गुजरात में डेरा डाल चुके हैं... पल-पल बदलते राजनीतिक समीकरण व पैंतरों के चलते यह तो तय है कि महाराष्ट्र में शिवसेना सरकार का भविष्य अंधकारमय नजर आता है... क्योंकि अब बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे इतनी आसानी से मानने वाले नहीं हैं... और उद्धाव ठाकरे भी क्या पार्टी से बगावत कर चुके अपने ही नेता पर विश्वास करने का जोखिम लेंगे..? क्योंकि कांग्रेस-राकांपा की रणनीति भी कैसे भी शिवसेना को कमजोर करना ही है... दूसरी तरफ भाजपा का स्पष्ट रुख है कि अगर शिवसेना अपने विधायकों और पार्टी को संभालने में विफल होती है तो भाजपा अपने आप सबसे बड़े दल के रूप में महाराष्ट्र में सरकार बनाने की दावेदार हो जाएगी... वैसे भी एकनाथ शिंदे के संपर्क में आए डेढ़ दर्जन से अधिक शिवसेना विधायक और इतने ही निर्दलीय उद्धव सरकार से पाला बदलकर संकट बढ़ा ही चुके हैं...