बोले - जैविक और प्राचीनतरीके हैं बेहद महत्वपूर्ण
   Date21-Jun-2022

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डॉ. भागवत का खेती के लिए भारत केंद्रित दृष्टिकोण का आह्वान
नागपुर द्य 20 जून (ए)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सोमवार को खेती के जैविक और प्राचीन तरीकों पर महत्व दिया और कहा कि इस तरह के स्थानीय जानकारी को अवैज्ञानिक के रूप में जांचे बिना अस्वीकार करना गलत होगा। डॉ. मोहन भागवत राष्ट्रीय पशु चिकित्सा विज्ञान अकादमी और महाराष्ट्र पशु और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वार्षिक दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे।
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत की खेती और पशुपालन के तरीके सबसे पुराने हैं। आधुनिक विज्ञान के साइड इफेक्ट हैं, लेकिन हमारे प्राचीन ज्ञान और तरीकों के साइड इफेक्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और स्थानीय जानकारी के उपयोग में लचीलेपन पर ध्यान देना चाहिए। स्थानीय ज्ञान को अवैज्ञानिक बताकर अस्वीकार करना गलत है। आप इसकी जांच करने के बाद इसे अस्वीकार कर सकते हैं। यदि यह सही नहीं है तो आप इसे अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं।