समभाव
   Date13-Jun-2022

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प्रेरणादीप
ए क बार गौतम बुद्ध राजपथ को छोड़कर कंटीली पगडंडी पर चल रहे थे तो लोगों को यह देखकर आश्चर्य हुआ। कारण पूछने पर भगवान बुद्ध बोले- 'वत्स! जीवनरूपी इस पगडंडी पर सुख-दु:ख, दोनों का ही भोग करना पड़ता है। सुखों से अधिक आसक्ति रखने पर और दु:खों से ज्यादा उद्विग्न होने पर जीवन की यात्रा कठिन ही नहीं, दुष्कर भी हो जाती है। ऐसे में आवश्यक हो जाता है कि रह-रहकर जीवन में दु:खों का अभ्यास कर लिया जाए; क्योंकि सुख-दु:ख में समभाव रखने से जीवन यात्रा सुगम हो जाती है। इसीलिए मैं सुखों का राजपथ त्यागकर इस कंटीली पगडंडी पर चल रहा हूं।Ó