उनके द्वारा लगाया 'संस्कार भारतीÓ पौधा आज विश्व वटवृक्ष बन गया
   Date11-Jun-2022

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लखनऊ द्य (स्वदेश समाचार)
संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री श्रद्धेय श्री योगेंद्रजी 'बाबाÓ का 98 वर्ष की आयु में शुक्रवार प्रात: 8 बजे राम मनोहर लोहिया रुग्णालय, लखनऊ में निधन हो गया। बाबा योगेंद्र कला तथा साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाली अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती के संस्थापक थे। अनेक वर्षों तक राष्ट्रीय संगठन मंत्री रहे। कला क्षेत्र में 'बाबाÓ के योगदान को देखते हुए वर्ष 2018 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। 'बाबाÓ इसके अतिरिक्त भाऊराव देवरस सेवा सम्मान तथा अहिल्याबाई होलकर राष्ट्रीय पुरस्कार तथा अनेक पुरस्कारों से भी सम्मानित हुए थे।
तत्कालीन संघ नेतृत्व ने योगेन्द्रजी की प्रतिभा को देखकर 1981 ई. में 'संस्कार भारतीÓ नामक संगठन का निर्माण कर उसका कार्यभार उन्हें सौंप दिया। योगेन्द्रजी के अथक परिश्रम से यह आज कलाकारों की अग्रणी संस्था बन गई है। अब तो इसकी शाखाएं विश्व के अनेक देशों में स्थापित हो चुकी हैं। योगेन्द्रजी शुरू से ही बड़े कलाकारों के चक्कर में नहीं पड़े। उन्होंने नए लोगों को मंच दिया और धीरे-धीरे वे ही बड़े कलाकार बन गए। इस प्रकार उन्होंने कलाकारों की नई सेना तैयार कर दी।बाबा योगेंद्र गोरखपुर, प्रयाग, बरेली, बदायूं और सीतापुर में प्रचारक रहे। वर्ष 1981 में जब संस्कार भारती संगठन बना, तो बाबा योगेंद्र को उसके अखिल भारतीय संगठन मंत्री का दायित्व सौंपा गया। विश्व को भीमबेटका तथा सरस्वती नदी के मार्ग की जानकारी देने वाले पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकरजी के साथ मिलकर उन्होंने कला साधकों के मन में राष्ट्रीय भावना के जागरण का कार्य लम्बे समय तक किया। उनके मार्गदर्शन में संस्कार भारती आज कला के क्षेत्र में देश की अग्रणी संस्था है। 7 जनवरी, 1924 को बस्ती, उत्तरप्रदेश के प्रसिद्ध वकील बाबू विजय बहादुर श्रीवास्तव के घर जन्मे योगेन्द्रजी के सिर से दो वर्ष की अवस्था में ही मां का साया उठ गया।
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