कार्य की महत्ता
   Date11-Jun-2022

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प्रेरणादीप
साबरमती आश्रम में एक दिन महात्मा गांधी ने यह योजना बनाई कि सबके जूठे बरतन बारी-बारी से कुछ लोग मिलकर मांजा करें। इससे आश्रमवासियों में प्रेमभाव बढ़ेगा तथा एक-दूसरे के बरतन मांजने में जो संकोच होता है, वह भी दूर हो जाएगा। इस कार्य का महत्व उन्होंने एक आश्रमवासी को बताया तो उसके गले यह बात न उतरी। वह कहने लगा-'अव्यवस्था का निराकरण कर, व्यवस्था लाना हमारा काम है। सबसे पहले मेरी और बा की बारी है।Ó इसके तुरंत बाद गांधीजी और बा बरतन मांजने में लग गए। अन्य आश्रमवासियों पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ा और वे भी ऐसा करने में साथ जुट गए। तब गांधीजी ने कहा-'इस कार्य को छोटा समझकर लोग करने से कतराते थे। कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, छोटा तो हमारा दृष्टिकोण होता है। स्वयं करने से लोगों का दृष्टिकोण भी बदल जाएगा।Ó